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इस्तीफे पर हरसिमरत कौर को बधाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने दुष्यंत चौटाला को दी चेतावनी

दिग्विजय ने कहा, मैं किसानों के समर्थन में सरकार से इस्तीफा देने के लिए हरमिसरत कौर बादल को बधाई देना चाहता हूं और दुष्यंत चौटाला को चेतावनी दूंगा।
इस्तीफे पर हरसिमरत कौर को बधाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने दुष्यंत चौटाला को दी चेतावनी
मोदी सरकार के कृषि से जुड़े बिल को लेकर देशभर में घमासान मचा हुआ है। बिल के विरोध में एनडीए से जुड़े शिरोमणि अकाली दल कोटे से मंत्री हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को कांग्रेस ने मज़बूरी करार दिया है। वहीं पार्टी के वरिष्ट नेता दिग्विजय सिंह ने हरसिमरत कौर के इस्तीफा देने पर उनको बधाई दी है।
दिग्विजय ने शुक्रवार को बिल के संबंध में बोलते हुए कहा, कांग्रेस सरकार ने किसानों के पक्ष में एपीएमसी अधिनियम बनाया था। लेकिन अब इस नए किसान विरोधी बिल के तहत कोई भी बड़ा व्यापारी मंडी खोल सकता है। मंडी में किसी भी विवाद को अधिकारियों द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सभी किसान विरोधी 4 अध्यादेशों को समग्रता में देखा जाना चाहिए।

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हरसिमरत कौर के इस्तीफे पर बोलते हुए दिग्विजय ने कहा, मैं किसानों के समर्थन में सरकार से इस्तीफा देने के लिए हरमिसरत सिंह बादल को बधाई देना चाहता हूं और दुष्यंत चौटाला को चेतावनी दूंगा कि वे इन किसान विरोधी बिलों पर बीजेपी का समर्थन न करें, अन्यथा उन्हें भविष्य में बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। उसे किसानों का समर्थन करना चाहिए।
इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने कहा कि RSS और बीजेपी की मूल मानसिकता किसान विरोधी है। मोदी जी आपदा में अवसर ढूंढते हैं, कोरोना की आपदा में उन्होंने अवसर ढूंढ लिया कि बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों को कैसे ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में घुसाया जाए और उसमें राज्यों का मंडी कानून बाधक था।
गौरतलब है कि हरसिमरत कौर ने लोकसभा में विधेयकों के पारित होने से महज कुछ ही घंटे पहले ट्वीट किया था, ‘‘मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों की बेटी और बहन के तौर पर उनके साथ खड़े होने पर गर्व है।’’ 
लोकसभा ने गुरुवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक पारित कर दिया था। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। 
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