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मानसून, लॉकडाउन में ढील और आर्थिक आंकड़ों पर होगी शेयर बाजार की नजर

गृह मंत्रालय के नये आदेश के अनुसार, पूरे देश में कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन 30 जून तक जारी रहेगी, जबकि राज्य के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों और वस्तुओं का आवागमन पर कोई रोक नहीं होगी।
मानसून, लॉकडाउन में ढील और आर्थिक आंकड़ों पर होगी शेयर बाजार की नजर
भारतीय शेयर बाजार बीते सप्ताह जोरदार लिवाली से गुलजार रहा। लेकिन इस सप्ताह बाजार की चाल मानसून के रूख, देशव्यापी लॉकडाउन में ढील, अमेरिका और चीन के बीच तनाव से वैश्विक बाजार में होने वाले उथल-पुथल, प्रमुख आर्थिक आंकड़े समेत कुछ अन्य कारकों से तय होगी। साथ ही, कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते मामले से पैदा होने वाली चिंता का असर बाजार पर बना रहेगा।
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की समयसीमा सोमवार से पांचवीं बार बढ़ाने का फैसला लिया है, लेकिन इसमें पहले की अपेक्षा ढील दी गई है। गृह मंत्रालय के नये आदेश के अनुसार, पूरे देश में कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन 30 जून तक जारी रहेगी, जबकि राज्य के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों और वस्तुओं का आवागमन पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार ने तीन चरणों में लॉकडाउन में ढील देने का फैसला लिया है जिनमें अगले चरण में होटल, शॉपिंग मॉल आदि को भी आठ जून से खोलने की अनुमति होगी।
उधर, निजी मौसम पूवार्नुमान कर्ता एजेंसी स्काइ्र्रमेट के अनुसार, मानसून ने इस बार दो दिन पहले ही केरल तट पर दस्तक दे दिया है। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग आईएमडी ने इसका खंडन किया है, लेकिन आईएमडी के अनुसार भी मानसून इस सप्ताह के आरंभ में ही दस्तक देगा। मानसून से देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गाड़ी चलती है, इसलिए इस पर बाजार और उद्योग सबकी नजर टिकी होती है।

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इन सबके बीच अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर रहेगा, जिससे मिलने वाले संकेतों से घरेलू शेयर बाजार की चाल पर असर देखने को मिल सकता है। सप्ताह के दौरान मई महीने के विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र के पीएमआई के आंकड़े भी जारी होंगे, जिसपर बाजार की नजर होगी। वहीं, ऑटो कंपनियां भी मई महीने की अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी। अरबिंदो फार्मा और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की ओर से बीते वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी जारी किए जाएंगे, जिसपर निवेशकों की नजर होगी।
घरेलू शेयर बाजार की चाल तय करने में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल की भी अहम भूमिका होगी। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की निवेश के प्रति दिलचस्पी पर भी बाजार की नजर होगी।
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