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Shaligram Stone: राम लला की मूर्ति जिस शालिग्राम शिला से बनेगी, जाने उसकी खास बातें

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का इंताजर भक्त लंबे समय से कर रहे है इसलिए राम मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार रात दिन राम मंदिर के निर्माण के लिए काम कर रही है ताकि जल्द ही राम मंदिर बनकर तैयार हो सके। इसलिए रामलला की मूर्ति को बनाने के लिए शालीग्राम पत्थर भी आयोध्या पहुंच चुका है
Shaligram Stone: राम लला की मूर्ति जिस शालिग्राम शिला से बनेगी, जाने उसकी खास बातें
अयोध्या में  बन रहे राम मंदिर का इंताजर भक्त लंबे समय से कर रहे है इसलिए राम मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार रात दिन राम मंदिर के निर्माण के लिए काम कर रही है ताकि जल्द ही राम मंदिर बनकर तैयार हो सके। 
इसलिए  रामलला की मूर्ति को बनाने के लिए शालीग्राम पत्थर भी आयोध्या पहुंच चुका है जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खुब वायरल हो रहे जब शालीग्राम पत्थर को आते हुए लोगों ने देखा तो लोग खुशी से वहीं उसकी पूजा और फूलों से स्वागत कर दिया। हजारों की संख्या में वहां भक्तों का ताता लग गाया। बता दें आयोध्या मेें जो राममंदिर बन रहा है उसमें भगवान राम की मूर्ती नेपाल के शालीग्राम शिलाओं से बनाई जाएगी।
शालीग्राम पत्थर भगवान विष्णु का स्वरूप 
कई लोगों के मन में सवाल होंगे की आखिर इस पत्त्थर में एसा क्या है जो इससे भगवान राम की मूर्ती को बनाया जाएगा। दरअसल ग्रंथों में शालीग्राम पत्थर को साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान विष्णु के ही सातवें अवतार माने गए हैं। राम भगवान की मूर्ति को जिस शालिग्राम पत्थर से तराशा जाएगा वह नेपाल की गंडकी नदी में पाया जाता है। शालिग्राम पत्थर का महत्व के  महत्व की  बात करें तो 
 मां लक्ष्मी का वास होता है
धार्मिक मान्यता है कि शालिग्राम पत्थर बेहद चमत्कारी माना गया है। कहते हैं जहां शालिग्राम की पूजा होती है वहां मां लक्ष्मी का वास होता है।वहीं गंडकी नदी के शालिग्राम शिला को लेकर पौराणिक कथा है कि एक बार भगवान विष्णु ने वृंदा (तुलसी) के पति शंखचूड़ को छल से मार दिया था।
शालिग्राम शिला पर मिले गदा का चिन्ह
वृंदा को इस बात का पता चला तो उन्होंने विष्णु को पाषाण होकर धरती पर निवास करने का श्राप दिया। चूंकि वृंदा श्रीहरि की परम भक्त थी। तुलसी की तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने कहा कि तुम गंडकी नदी के रुप में जानी जाओगी और मैं शालिग्राम बनकर इस नदी के पास वास करुंगा। कहते हैं कि गंडकी नदी में जो शालिग्राम शिला है उन पर चक्र, गदा का चिन्ह पाए जाते हैं। 
भगवान विष्णु की उपासना शालिग्राम के रूप में होती  है
 हिंदूओं में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की पूजा विभिन्न प्रकार से की जाती है।जैसे ब्रह्मा जी की पूजा शंख के रूप में और भगवान शिव की उपासना शिवलिंग के रूप में की जाती है। ठीक उसी तरह भगवान विष्णु की उपासना भगवान शालिग्राम के रूप में की जाती है। कहते हैं कि 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं। इन सभी को श्रीहरि विष्णु के 24 अवतारों से जोड़ा गया है। विष्णु के गोपाल रूप में गोलाकार शालिग्राम की पूजा होती है। मछली के आकार के शालिग्राम को मत्स्य अवतार का रुप माना जाता है। 


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