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UN महासभा में सऊदी अरब के शाह द्वारा पहली बार दिया भाषण कई वजहों से ख़ास

शाह सलमान को देश में हो रहे बड़े बदलावों के लिए भी जाना जाता है। महिलाओं को दिए जाने गए कई अधिकार के पीछे जितने क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान हैं उतने ही शाह शामिल भी हैं। सलमान शाह बनने से पहले करीब 48 सालों तक रियाद के गवर्नर रहे। इतना ही नहीं वे देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं।
UN महासभा में सऊदी अरब के शाह द्वारा पहली बार दिया भाषण कई वजहों से ख़ास
संयुक्‍त राष्‍ट्र आम महासभा (United Nation General Assembly)  की उच्‍चस्‍तरीय बैठक 22 सिंतबर को शुरू हुई थी। इस बार की यह बैठक कई मायनों में बेहद खास है। इन वजहों में सबसे महत्वपूर्ण वजह यह है कि इस बार महासभा का 75वां सत्र आयोजित हुआ है। वहीँ दूसरी वजह कोरोना महामारी के कारण महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि इतिहास में पहली बार सभी राष्ट्र अध्यक्ष वर्चुअल रूप से यूएन में सम्बोधन करेंगे वो भी पहले से रिकॉर्ड किये गए वीडियो सन्देश के जरिए और इसके अहम होने की तीसरी बड़ी वजह सऊदी अरब के शाह सलमान बने हैं।

आपको बता दें कि सलमान बिन अब्‍दुलअजीज अल साउद, साल 2015 में अपने भाई नाएफ बिन अब्‍दुलअजीज के निधन के बाद शाह बने थे।लेकिन अपना यह पद धारण करने बाद उन्होंने पिछले पांच सालों में कभी यूएन को सम्बोधित नहीं किया। यह पहला मौका है जब उन्‍होंने इस महासभा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित किया।उनके इस सम्बोधन में भी कुछ ख़ास बातें रहीं। जिसमे पहला था इस्‍लामिक देश और आतंकवाद, दूसरा था ईरान और तीसरा था इजरायल। शाह सलमान को देश में हो रहे बड़े बदलावों के लिए भी जाना जाता है। महिलाओं को दिए जाने गए कई अधिकार के पीछे जितने क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान हैं उतने ही शाह शामिल भी हैं। सलमान शाह बनने से पहले करीब 48 सालों तक रियाद के गवर्नर रहे। इतना ही नहीं वे देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। इसी के साथ शाह दो पवित्र मस्जिदों के कस्‍टोडियन भी हैं।
उनके सम्बोधन की बात करें तो महासभा को पहली बार संबोधित करते हुए उन्‍होंने अपनी सरकार की कुछ बुनियादी नीतियों और सऊदी अरब के महत्व पर जोर दिया। इसमें उन्‍होंने फिलिस्‍तीनियों को दिए गए अपने वायदे को भी दोहराया इसी के साथ उन्होंने अपने आप को इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों का संरक्षक बताया। अपने भाषण में वे ईरान पर हमला करने से भी नहीं चूके और उसको पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने का जिम्‍मेदार तक ठहराया दिया। 
उनका दिया ये भाषण इसलिए भी काफी महत्व रखता है क्‍योंकि वैश्विक स्तर पर सऊदी के क्राउन प्रिंस जितने फुर्तीले दिखाई देते हैं उतने शाह नहीं दिखाई देते। शाह सलमान सार्वजनिक रूप से काफी कम ही मुद्दों पर बोलने के लिए भी जाने जाते हैं। इसलिए भी उनका संयुक्‍त राष्‍ट्र की आम महासभा में बोलना एक अनोखी घटना है। ऐसा करने वाले वह सऊदी के दूसरे शाह हैं। वहीँ आपको बता दें कि इससे पहले साल 1957 में उनके भाई और सऊदी शाह सऊद ने महासभा को संबोधित किया था।
अपने इस भाषण में शाह ने कहा कि इस्‍लामिक वर्ल्‍ड में सऊदी अरब की मुख्य जिम्मेदारी यह बनती है कि हम इस्लाम धर्म को उन आतंकी संगठनों से बचाकर रखें जो इसको बदनाम करने पर तुले हुए है। आपको बता दें कि इस्‍लामिक देशों के संगठन इस्‍लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में सऊदी अरब की प्रमुख भूमिका है। इस संगठन के 50 से अधिक सदस्‍य देश हैं। हालांकि बीते कुछ समय से पाकिस्‍तान, तुर्की, ईरान और मलेशिया मिलकर एक नया इस्‍लामिक संगठन खड़ा करने की कोशिश में लगे हुए हैं। इस लिहाज़ से देखा जाए तो अपने संबोधन में सभी इस्‍लामिक देशों और आतंकवादी मुद्दों पर बात कर उन्‍होंने आतंकवाद के प्रति अपना रवैया और इस्लाम से उसके नाते को अलग करने का प्रयास किया। 
शाह ने खाड़ी देशों और इजराइल तथा फिलिस्तान के बीच लम्बे समय से चल रहे तनाव पर भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि फिलीस्‍तीन राष्ट्र के निर्माण से पहले वो इजरायल को मान्यता नहीं दे सकते हैं। इस महासभा में इजरायल से संबंधित बयान बेहद मायने रखता है। दरअसल, अमेरिका और सऊदी अरब के काफी समय से मजबूत संबंध रहे हैं। वहीं अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ती नज़दीकियां और हाल में हो रहे शान्ति समझौते भी किसी से छिपे नहीं है। अब तक चार देश उन शान्ति समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुके है इस सूची में आखिरी नाम बहरीन है जिसने कुछ दिन पहले ही इस समझौते पर मुहर लगाई। वहीँ कुछ दिन पहले अमेरिका के राजनयिक की ओर से आये बयान में यह कहा गया था कि इस शान्ति समझौते में अगला देश सऊदी अरब होगा जिसपर शाह ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जबकि कई विशेषज्ञ यह कयास लगा रहे है कि  ईरान से बढ़ती दूरियां इजराइल और सऊदी अरब को नज़दीक ला सकती है आखिर दुश्मन का दुश्मन दोस्त जो होता है. 
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