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यूपी : मुख्यमंत्री योगी ने डॉ भीमराव आंबेडकर को अर्पित की श्रद्धांजलि, संबोधन के दौरान विपक्ष पर भी साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ भीमराव आंबेडकर की 66वीं पुण्यतिथि सोमवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने राजनीति में परिवारवाद को बाबा साहब के मूल्यों के विरुद्ध बताया
यूपी : मुख्यमंत्री योगी ने डॉ भीमराव आंबेडकर को अर्पित की श्रद्धांजलि, संबोधन के दौरान विपक्ष पर भी साधा निशाना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ भीमराव आंबेडकर की 66वीं पुण्यतिथि सोमवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने राजनीति में परिवारवाद को बाबा साहब के मूल्यों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा यहां आंबेडकर सभा द्वारा आयोजित श्रृद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस को राजनीति में वंशवाद का जीवंत उदाहरण बताया। योगी ने कहा, बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए जानना होगा कि किसी राजनीतिक दल पर एक परिवार का कब्जा होना, अलोकतांत्रिक है। उल्लेखनीय है कि, 6 दिसंबर को हर साल डॉ अम्बेडकर की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। 
देश की मार्गदर्शक पुस्तिका होती है उसका संविधान 
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, किसी भी देश का संविधान उसके शासन संचालन की मार्गदर्शक पुस्तिका होती है जो देश को व्यवस्थित मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि, डा अंबेडकर ने भारत को ऐसे ही व्यवस्थित शासन तंत्र के सफल संचालन का मार्ग दिखाने वाले संविधान की रचना कर देश को आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाया। इससे पहले  उन्होंने ट्वीट कर कहा, महान विधिवेत्ता, सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर, भारत के सर्वसमावेशी संविधान के शिल्पकार, भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण एवं समतामूलक समाज की स्थापना हेतु आपके कार्य सभी के लिए महान प्रेरणा हैं।
विपक्ष पर भी साधा निशाना 
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रृद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना उस पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा, आपातकाल के समय कुछ लोगों ने संविधान का गला घोंटने का प्रयास किया था। उन लोगों ने लोकतंत्र को रौंदने का प्रयास किया था। उस वक्त देश ने एकजुट होकर उनका प्रतिकार किया। उन्होने कहा, वंशानुगत रूप से किसी दल का अध्यक्ष बनना, लोकतंत्र के खिलाफ है। वंशवादी दलों की कार्यशैली भी लोकतांत्रिक नहीं हो सकती। सपा-बसपा-कांग्रेस तीनों इसके जीवंत उदाहरण हैं। 
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