अधिवक्‍ता प्रमोद कुमार की मृत्‍यु के विरोध में 3 दिवसीय विरोध प्रदर्शन 15 अक्‍टूबर से

पटना : राजधानी में हुए आफत भरी बारिश ने राज्य सरकार और नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी थी। अब भी शहर के कई इलाकों में बारिश का पानी जमा है। राज्य सरकार की तरफ से राहत कार्य चलाने के दावे तो किए गए। लेकिन अब जो मामला सामने आया है, वो सरकारी लापरवाही की पूरी बानगी को पेश करता है। आफत भरी बारिश के दौरान समय पर मेडिकल की सुविधान न मिल पाने की वजह से पटना में एडवोकेट प्रमोद कुमार की मौत हो गई। एडवोकेट की मौत का ये मामला 29 सितंबर का है, लेकिन अब जाकर सामने आया है। परिवार वाले मदद मांगते रह गए, पर उनकी हेल्प करने कोई भी आगे नहीं आया।

इसलिए अब बार काउंसिल के मेंबर्स और परिवार वालों को लॉयर्स वेलफेयर फोरम की अध्यक्ष अधिवक्‍ता शहनाज फातमा ने तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है, जो 15 अक्‍टूबर से 17 अक्‍टूबर तक होगी। इसके तहत सिविल कोर्ट, पटना के पश्चिमी द्वार पर 15 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12 बजे से धरना, 16 अक्टूबर 2019 को कैंडल मार्च सिविल कोर्ट  पटना से कारगिल चौक पटना तक दोपहर 3 बजे से और 17 अक्टूबर 2019 को दीवानी न्यायालय, पटना से कारगिल चौक तक आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया।

काउंसिल के मेंबर्स और परिवार वालों का मानना है कि अधिवक्ता प्रमोद की मृत्यु आपराधिक साजिश और जिला प्रशासन, पटना और बिहार सरकार की लापरवाही के कारण हुई थी, जो मृतक को चिकित्सा प्रदान करने में असफल रहे। इसलिए वे उनकी मांगे हैं - प्रदेश में अधिवक्‍ता सुरक्षा एंव मुआवजा अधिनियम यथाशीघ्र लागू किया जाये। प्रमोद कुमार की मृत्‍यु जलजमाव के कारण हो जाने पर मृतक की पत्‍नी को 25 लाख रूपये का मुआवजा दे सरकार। मृतक अधिवक्‍ता प्रमोद कुमार के परिवार से किसी एक को मिले नौकरी। ड्रेनेज सिस्‍टम में लापरवाही बरतने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ आई पी सी की धारा 302 और 120 बी के तहत प्राथमिकी दर्ज हो। एवं स्‍पीडी ट्रायल के माध्‍यम से कार्रवाई हो। सिविल सर्जन, डीएम कंट्रोल रूम के कर्मी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ टीम को किया जाये निलंबित।  

आपको बता दें कि 59 साल के प्रमोद कुमार पटना सिविल कोर्ट में एडवोकेट थे और वो पिछले 29 साल से रेगूलर प्रैक्टिस कर रहे थे। वो अपने परिवार के साथ कंकड़बाग के 258 रेंटल फ्लैट में रह रहे थे। छोटे भाई कृष्ण बिहारी के अनुसार एडवोकेट प्रमोद कुमार बीमार चल रहे थे। लगातार उनका डायलिसिस चल रहा था। बात 28 सितंबर की रात 11 बजे के करीब की है। अचानक उनका ब्लड प्रेशर हाई हो गया। पूरा परिवार उन्हें जल्द से जल्द इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाना चाहता था। लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से पूरे इलाके में भारी जल जमाव हो चुका था। रूबन सहित कई हॉस्टिपल को एंबुलेंस भेजने के लिए कहा। लेकिन जल जमाव की वजह से एंबुलेंस की सुविधा उन्हें नहीं मिली।

घबराए परिवार वालों ने मदद के लिए पटना की डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम में कॉल किया। वहां से उन्हें पटना के सिविल सर्जन, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का नंबर उपलब्ध कराया गया। लगातार सिविल सर्जन को कॉल किया गया. ताकि हॉस्पिटल ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा किसी तरह से मिल जाए। कृष्ण बिहारी के अनुसार सिविल सर्जन ने कॉल उठाया ही नहीं।  कहीं से कोई मदद नहीं मिलने पर परिवार वालों ने एडवोकेट प्रमोद कुमार को बाइक से ही हॉस्पिटल ले जाने की कोशिश भी की थी। लेकिन पानी में जाते ही बाइक बंद हो गई। जिसके बाद इलाज सही समय पर नहीं होने की वजह से उनकी मौत हो गई।
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