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भारतीय वायुसेना का 88वां स्थापना दिवस, राफेल की धमाकेदार एंट्री, तेजस और जगुआर ने भी दिखाया दम

भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य नभ: स्पृशं दीप्तम' गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है।
भारतीय वायुसेना का 88वां स्थापना दिवस, राफेल की धमाकेदार एंट्री, तेजस और जगुआर ने भी दिखाया दम
भारतीय वायुसेना आज अपना 88वां स्थापना दिवस मना रही है। गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर आयोजित कार्यक्रम में  कुल 56 एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया। तेजस और जगुआर के साथ हाल में ही वायुसेना में शामिल हुए लड़ाकू विमान राफेल ने धमाकेदार एंट्री के साथ अपनी शक्ति दिखाई। आसमान में राफेल की गड़गड़ाहट दुश्मनों के मन में भय पैदा करने वाली है।
वायुसेना दिवस के मौके पर चिनूक हेलिकॉप्टर, अपाचे हेलिकॉप्टर, ग्लोबमास्टर, सुखोई समेत कई लड़ाकू विमानों ने अपना दम दिखाया। वहीं हाल में ही भारतीय वायुसेना में शामिल हुए राफेल ने अपना दम दिखाया। आम लोगों ने पहली बार राफेल को फ्लाई पास्ट का हिस्सा बनते हुए देखा, जो अपने आप में ही जोश भरने वाला है। 
राफेल के साथ थ्री फॉर्मेशन में जगुआर लड़ाकू विमान भी रहे, जिन्होंने आसमान में उड़ान भरी। राफेल लड़ाकू विमान के अलावा सूर्यकिरण टीम ने आसमान में अपने अद्भुत करतब दिखाए। इस टीम के अंतर्गत कई लड़ाकू विमान आते हैं जो दुश्मन को वक्त रहते ही ध्वस्त कर सकते हैं। इस टीम में विंग कमांडर अर्जुन यादव समेत अन्य वायुवीर शामिल रहे।
भारतीय वायुसेना ने दुनिया में बनाई एक विशिष्ट पहचान 
अपने पराक्रम और दम से वायुसेना ने दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। 8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की गई थी। हर साल 8 अक्टूबर वायुसेना दिवस मनाया जाता है। देश के आज़ाद होने से पहले वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स के नाम से जाना जाता था। 
1 अप्रैल 1933 को वायुसेना का पहला दस्ता बना जिसमें 6 आएएफ-ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था। जब देश आज़ाद हुआ तो वायुसेना के नाम में से "रॉयल" शब्द को हटाकर सिर्फ "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया था। भारतीय वायुसेना ने दुसरे विश्वयुद्ध के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।
महाभारत से प्रेरित है वायुसेना का आदर्श वाक्य 
भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य महाभारत से प्रेरित है। वायुसेना का आदर्श वाक्य है - 'नभ: स्पृशं दीप्तम'। यह वाक्य गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है।
वायुसेना ध्वज, वायु सेना निशान से अलग, नीले रंग का है जिसके शुरुआती एक चौथाई भाग में राष्ट्रीय ध्वज बना है और बीच के हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों अर्थात्‌ केसरिया, श्वेत और हरे रंग से बना एक वृत्त है। यह ध्वज 1951 में अपनाया गया। 
वायुसेना दिवस के मौके पर शानदार परेड और भव्य एयर शो का आयोजन होता है। हर साल की तरह इस बार भी हिंडन बेस पर वायुसेना अपने शौर्य का प्रदर्शन करेगी। वायुसेना के एक से एक विमान और जवान हवा में हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। वायुसेना दिवस से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान ही वायुवीरों ने अपने शक्ति प्रदर्शन की झलक दिखा दी थी।

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