श्रीलंका में गृहयुद्ध की समाप्ति को हुए एक दशक, जान गंवाने वाले लोगों को दी गई श्रद्धांजलि

कोलंबो : श्रीलंका अभी भी ईस्टर के मौके पर हुए बम धमाकों के ज़ख्म से अभी उबरा नहीं है। इसी बीच शनिवार को सरकार और लिट्टे के बीच चले घातक गृह युद्ध के अंत के 10 साल पूरे होने पर युद्ध में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हालांकि, पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी।

श्रीलंकाई सरकार ने 18 मई, 2009 को मुल्लाईतिवु के एक तटीय गांव में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को मारकर इस युद्ध का अंत किया था। यह गृहयुद्ध मुख्य रूप से इस द्वीपीय राष्ट्र के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में लड़ा गया था।

तीन दशक से भी अधिक लंबे समय तक चले संघर्ष में कम से कम 100,000 लोग मारे गए थे। युद्ध के बाद भी सुरक्षाकर्मियों सहित हजारों लोगों के लापता होने की खबर थी।

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कोलंबो गजट ने बताया कि युद्ध में जान गंवाने वालों को याद करने के लिए उत्तरी श्रीलंका के कई हिस्सों में हजारों लोग इकट्ठा हुए।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार रविवार को विजय दिवस समारोह के दौरान युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि देगी। बयान में लोगों से देश के लिए अपना जीवन कुर्बान करने वाले की याद में ‘‘शांति का दीपक’’ जलाने को कहा गया है।

कोलंबो गजट की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर युद्ध के एक दशक बाद भी पीड़ितों को न्याय दिलाने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

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