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सिराज ने बताया 5 विकेट चटकाने का रहस्य, बोले- खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं

मोहम्मद सिराज ने सोमवार को पहली बार टेस्ट मैच की एक पारी में पांच विकेट लिए। वह गाबा में एक पारी में पांच विकेट लेने वाले भारत के पांचवें गेंदबाज बन गए हैं।
सिराज ने बताया 5 विकेट चटकाने का रहस्य, बोले- खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं
मोहम्मद सिराज ने सोमवार को पहली बार टेस्ट मैच की एक पारी में पांच विकेट लिए। वह गाबा में एक पारी में पांच विकेट लेने वाले भारत के पांचवें गेंदबाज बन गए हैं। सिराज ने ऑस्ट्रेलिया के साथ खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज में कुल 134.1 ओवर फेंके हैं जो भारतीय गेंदबाजों में सबसे ज्यादा हैं। वह इस सीरीज में अभी तक भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। इसके अलावा मैदान पर उनकी फील्डिंग भी काफी चुस्त दिखी है। उन्होंने अपनी फिटनेस का श्रेय लॉकडाउन में घर में की गई फिटनेस को दिया।
चौथे दिन सोमवार का खेल खत्म होने के बाद सिराज ने एक सवाल पर कहा, मैं इसके लिए सोहम भाई (सोहम देसाई, स्ट्रैंग्थ एंड कंडीशनिंग कोच) का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने मेरे लिए एक कार्यक्रम डिजाइन किया और मेरी ट्रेनिंग पर काम किया। फिटनेस काफी अहम है। मैंने लॉकडाउन से अपने आप पर काम किया है। मुझे उनसे नियमित कार्यक्रम मिल रहे हैं जो मैं लॉकडाउन में फॉलो कर रहा था। मुझे अब पता चला कि फिटनेस कितनी जरूरी है, खासकर टेस्ट क्रिकेट में।
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पर सिराज ने टेस्ट पदार्पण किया था। उनका यह दौरा काफी भावुक रहा। ऑस्ट्रेलिया में आने के कुछ दिन बाद ही उनका पिता का निधन हो गया था, लेकिन वह क्वारंटीन में रहने के कारण पिता के अंतिम संस्कार में नहीं जा सके। उन्होंने नस्लीय टिप्पणी का भी सामना किया। उनसे जब पूछा गया कि इतने भावुक दौरे पर सफलता हासिल कर कैसा महूसस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, सबसे पहले मैं भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि मुझे खेलने का मौका मिला। यह मेरे पिता की इच्छा थी कि उनका बेटे खेले और पूरा विश्व उसको देखे। काश के वह होते और देख पाते तो वह काफी खुश होते। यह उनका आशीर्वाद है कि मैं पांच विकेट ले पाया। मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं।
उन्होंने कहा, मैं काफी भाग्यशाली हूं कि मैं पांच विकेट ले सका। यह काफी मुश्किल स्थिति है। मेरे पिता नहीं हैं। मैंने अपने घर पर बात की, अपनी मां से बात की। उन्होंने मुझे प्रेरित किया। मुझे मजबूत किया। उनके समर्थन से मुझे मानसिक तौर पर काफी मजबूत की। मुझे लगता है कि पिता की इच्छा थी वो मुझे पूरी करनी हैं।

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