एआई चश्मे से दूर होगी नेत्रहीनों की बाधा; एम्स मुफ्त में बांटेगा 35 हजार की कीमत वाले स्मार्ट ग्लास
AIIMS Smart Glasses Initiative: देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने नेत्रहीन छात्रों के लिए एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस पहल के तहत ऐसे छात्र, जिनकी दृष्टि वापस लाना संभव नहीं है, उन्हें विशेष एआई आधारित स्मार्ट विजन चश्मे मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आरपीआई सेंटर की प्रमुख प्रोफेसर राधिका टंडन ने बताया कि यह कदम खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के नेत्रहीन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए उठाया गया है, जिससे उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन को आसान बनाया जा सके। इस परियोजना के अंतर्गत करीब 1700 से 2200 नेत्रहीन छात्रों और शिक्षकों को ये स्मार्ट चश्मे देने की योजना है। इसकी शुरुआत हो चुकी है और हाल ही में कम्यूनिटी ऑफ्थैलमोलॉजी आरपीआई सेंटर, एम्स दिल्ली द्वारा विजन ऐड और रोटरी क्लब के सहयोग से करीब 40 छात्रों और शिक्षकों को ये चश्मे वितरित किए गए।
कैसे काम करता है यह स्मार्ट चश्मा
डॉ.टंडन ने बताया कि यह एआई आधारित चश्मा एंड्रॉयड स्मार्टफोन से जुड़ा होता है और एक विशेष ऐप के माध्यम से काम करता है। यह किसी भी दृश्य को पहचानकर उसे आवाज में बदल देता है, जिससे नेत्रहीन व्यक्ति अपने आसपास की वस्तुओं को समझ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यह चश्मा किताब के पन्नों की फोटो लेकर उसे पढ़कर सुना सकता है, जिससे छात्र आसानी से पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा, यह चश्मा भारतीय मुद्रा नोटों की पहचान भी कर सकता है। यदि किसी के सामने 10, 50 या 100 रूपये का नोट होगा, तो यह तुरंत उसकी जानकारी आवाज में दे देगा। इससे नेत्रहीन लोगों को रोजमर्रा के कामों में बड़ी सहायता मिलेगी।
मुफ्त वितरण और छात्रों की प्रतिक्रिया
इस चश्मे की कीमत लगभग 35,000 रुपये है, लेकिन इसे पूरी तरह मुफ्त में दिया जा रहा है। इस पहल से लाभान्वित छात्र बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इससे वे न सिर्फ पढ़ाई कर पाएंगे, बल्कि संगीत सुनने, चीजों को पहचानने और आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी।
कम्यूनिटी ऑप्थैलमोलॉजी विभाग के हेड डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि इस तकनीक से नेत्रहीन छात्रों को नई दिशा मिलेगी और भविष्य में इसके फीडबैक के आधार पर इसे और बेहतर बनाया जाएगा। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रवीण वशिष्ठ ने कहा कि यह चश्मा नेत्रहीन बच्चों के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा। दिल्ली-एनसीआर के 35 ब्लाइंड स्कूलों में इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे हजारों बच्चों का भविष्य उज्जवल होने की उम्मीद है।

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