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भारत में अमेरिका जैसी सड़कें

भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में सड़क परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत में अमेरिका जैसी सड़कें
भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में सड़क परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी भी देश की प्रगति का अंदाजा वहां की सड़कों को देखकर लगाया जाता है। देश की अर्थव्यवस्था को खुशहाल बनाने के लिए सड़कों का नेटवर्क बहुत जरूरी है। राजमार्गों के निर्माण से ही लोगों का सम्पर्क बढ़ता है। सड़कों के माध्यम से ही कच्चा माल कारखानों तक पहुंचता है और कारखाने से उत्पाद लोगों तक पहुंचते हैं। किसी भी देश में उत्पादित होने वाली वस्तुओं और सेवाओं तथा उनके एक कोने से दूसरे कोने तक आवागमन पर उस देश की विकास दर निर्भर करती है। इसलिए कुशल परिवहन किसी देश के तेज विकास के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शासनकाल में स्वर्णिम चतुभुर्ज महा राजमार्ग परियोजना शुरू की गई थी। यह 6 लेन वाली महा राजमार्ग की सड़क परियोजना है जो दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुम्बई और दिल्ली को जोड़ती है। उत्तर दक्षिण कॉरिडोर श्रीनगर और कन्याकुमारी को आपस में जोड़ता है। पूर्व पश्चिम कॉरिडोर सिलचर और पोरबंदर को आपस में जोड़ता है। इस सुपर हाइवे प्रोजैक्ट का मुख्य उद्देश्य भारत के बड़े शहरों के बीच दूरी को कम करना है। आज भारत में सड़कों का जाल दुनिया के विशाल नेटवर्कों में से है। आज गांव से शहरों को सड़कों के माध्यम से जोड़ा गया है। राजमार्ग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बन चुके हैं। केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नि​ितन गडकरी ने कहा है कि भारत में 2024 तक अमेरिका जैसी सड़क बुनियादी ढांचा हो जाएगा। देश में वृहद संरचना उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न भागों को जोड़ने वाले 26 हरित राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है। ये राजमार्ग दिल्ली को जयपुर, चंडीगढ़, हरिद्वार, अमृतसर, ​मुम्बई, कटरा, श्रीनगर और वाराणसी तथा अन्य शहरों को कोलकाता से जोड़ेंगे। इन राजमार्गों के निर्माण से यात्रा समय भी बहुत कम हो जाएगा।  देश में सड़क बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए धन की कोई कमी नहीं। देश में सड़क परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की उपलब्धि का श्रेय मोदी सरकार को जाता है। आज लम्बी दूरी की यात्राएं काफी सहज हो गई हैं। आज यात्राएं कुछ घंटों में ही सुगम हो गई हैं।राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हमारे जीवन को काफी सहज और सुगम बना दिया है। सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह रही कि कोविड के चलते लाकडाउन अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में तेज बढ़ौतरी देखी गई। 2020-21 के दौरान राजमार्ग निर्माण की गति 36.5 किलोमीटर प्रतिदिन रही, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में अब तक की सबसे तेज गति है। भारत ने केवल 24 घंटों में 2.5 किलोमीटर चार लेने कंक्रीट सड़क का निर्माण और केवल 21 घंटों में 26 किलोमीटर सिंगल लेन विटुमेन सड़क का निर्माण करके एक विश्व रिकार्ड भी बनाया है। इससे पहले सड़क निर्माण क्षेत्र में एक और गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड भी बनाया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक ठेकेदार ने 18 घंटे में 25.54 किलोमीटर के सिंगल लेन सड़क का निर्माण किया था। यह सड़क सोलापुर-बीजापुर के बीच बन रहे 4 लेन का हिस्सा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नए भारत की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वर्ष 2022-23 में 50 किलोमीटर प्रतिदिन की रिकार्ड गति से 18 हजार किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 2025 तक दो लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब समयबद्ध और लक्ष्योन्मुखी मार्ग में विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि सड़क अवसंरचना ही आत्मनिर्भर भारत की आशा है।अब सड़कों और राजमार्गों के निर्माण के लिए विश्व स्तरीय स्वदेशी तकनीक उपलब्ध है। सड़क और राजमार्ग क्षेत्र में सस्ती, ​टिकाऊ तथा पुनर्कचक्रण योग्य प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र, पहाड़ी राज्यों और अन्य पिछड़े क्षेत्रों में उनके समग्र विकास के लिए राजमार्गों का निर्माण लगातार जारी है। पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले 8 वर्षों में राजमार्गों के अलावा विशाल रेल-सड़क नेटवर्क से इस क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आए हैं। बेहतर परिवहन और आर्थिक समृद्धि के लिए जम्मू-कश्मीर में 3 नए राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक एक्सप्रेस रोड कॉरिडोर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा रहा है। देश के सीमांत क्षेत्रों में कभी अच्छी सड़कें नहीं थीं। सीमा पर स्थित सड़कों के निर्माण की ​जिम्मेदारी बार्डर रोड संगठन के पास है। अब सीमांत क्षेत्रों में सामरिक महत्व की सड़कें बनाई जा रही हैं, जिससे सीमा पर किसी भी ​स्थिति से निपटने के लिए सेना का साजो-सामान बहुत जल्द सेना तक पहुंचाया जा सकता है। हाइवे तो ऐसे बनाए गए हैं जिन पर लड़ाकू विमान भी लैंड और उड़ान भर सकें।दुखद पहलु यह है कि शहरों और महानगरों के भीतर सड़कों की हालत बहुत खस्ता है। महानगरों की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से सड़कें टूटी-फूटी हैं। थोड़ी सी बारिश में सड़कें बह जाती हैं। इस और  राज्य सरकारों और  लोक निर्माण ​विभाग को ध्यान देना होगा। सड़कों पर गड्ढे अपनी दुर्दशा बयान करते चिढ़ाते नजर आते हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जोन एम कैनेडी ने कहा था ‘अमेरिकी सड़कें इसलिए अच्छी नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका समृद्ध है, बल्कि अमेरिका इसलिए समृद्ध है क्योंकि अमेरिकी सड़कें अच्छी हैं। नए भारत के निर्माण के लिए अच्छी सड़कों का होना बहुत जरूरी है और देश इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com
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