लखनऊ में अमित शाह बोले- जिसे विरोध करना हो करे, मगर सीएए वापस नहीं होने वाला

03:08 PM Jan 21, 2020 | Kaushik Sharma
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध कर रहे विपक्ष की आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी होने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को साफ किया कि जिसको विरोध करना हो करे, मगर सीएए वापस नहीं होने वाला है। शाह ने सीएए के समर्थन में यहां आयोजित जागरूकता रैली में कहा कि सीएए नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि देने का कानून है, मगर कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी है। 

उन्होंने कहा ''जिसको विरोध करना हो करे, मगर सीएए वापस नहीं होने वाला है।'' शाह ने विपक्षी दलों को सीएए पर बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा ''सीएए के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इससे देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। मैं कहने आया हूं कि जिसमें भी हिम्मत है वह इस पर चर्चा करने के लिये सार्वजनिक मंच ढूंढ ले। हम चर्चा करने के लिये तैयार हैं।'' 

शाह ने कहा कि सीएए की कोई भी धारा किसी भी नागरिक की नागरिकता लेती हो तो बता दें। उन्होंने कहा कि आज देश में इसके खिलाफ दंगा और धरना-प्रदर्शन कराया जा रहा है जो गलत है। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा का सीएए के प्रति जनजागरण का अभियान इस कानून के खिलाफ दुष्प्रचार करके देश को तोड़ने की साजिश रचने वालों के खिलाफ मुहिम है। 

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उन्होंने इस मौके पर 'जो बोले सो निहाल' का नारा भी लगवाया। गृह मंत्री ने सीएए का विरोध करने वाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से पूछा ‘‘ जब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में करोड़ों लोग धर्म के आधार पर मारे गये तब आप कहां थे। कश्मीर से पांच लाख पंडितों को विस्थापित किया गया, मगर इन दलों के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। 

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को अपने जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है।’’ शाह ने अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को अपनी सरकार की उपलब्धि बताते हुए दावा किया कि अयोध्या में तीन महीने के अंदर आसमान छूता हुआ मंदिर बनेगा। 

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