+

बकिंघम पैलेस के भीतर रंगभेद

ब्रिटेन के शाही परिवार के डयूक ऑफ ससेक्स प्रिंस हैरी और डचेज ऑफ सेसक्स मेगन मर्केल ने ओप्राविनफ्री को जो इंटरव्यू दिया है, वह सनसनीखेज तो है ही साथ ही बहुत सारे सवाल भी खड़े करता है।
बकिंघम पैलेस के भीतर रंगभेद
ब्रिटेन के शाही परिवार के डयूक ऑफ ससेक्स प्रिंस हैरी और डचेज ऑफ सेसक्स मेगन मर्केल ने ओप्राविनफ्री को जो इंटरव्यू दिया है, वह सनसनीखेज तो है ही साथ ही बहुत सारे सवाल भी खड़े करता है। किसी महिला के लिए राजशाही घराने की बहू बनकर जिन्दगी गुजारना वास्तव में कैसा है, इसका सच भी सामने आ चुका है। मेगन ने शाही परिवार में नस्लभेद, अपने मानसिक स्वास्थ्य और मीडिया के प्रति उनके रवैये पर विस्तार से बातचीत की है। हैरी और मेगन ने बताया कि शाही परिवार के एक सदस्य ने पूछा था कि उनके बेटे का रंग कितना काला हो सकता है। हालांकि हैरी ने यह भी स्पष्ट किया था कि नस्लभेदी टिप्पणी महारानी या प्रिंस फिलिप ने नहीं की थी। अभिनेत्री मेगन मर्केल ब्रिटेन राजघराने में मिक्सड रेस की पहली सदस्य हैं। शाही परिवार के साथ रहने के अपने अनुभव पर मेगन का कहना था कि उसे कई तरह के नियमों में बांध दिया गया था। वह अपने दोस्तों के साथ लंच पर बाहर नहीं जा सकती थी। उसे बहुत सारी चीजें करने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उसका अकेलापन बढ़ता ही गया। हैरी और मेगन ने अपने बच्चे आर्ची को प्रिंस या प्रिंसेज की उपाधि न दिए जाने की व्यथा भी व्यक्त की। शाही घराने ने नियम बदल दिए गए जब मेगन गर्भवती थी। इस तरह शाही परिवार ने उसके हक को छीन लिया था।
पिछले वर्ष की शुरूआत में प्रिंस हैरी ने ऐलान किया था कि वह और उनकी पत्नी मेगन राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य की भूमिका से खुद को अलग कर रहे हैं और वे अब खुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्रत​ बनाने के लिए काम करेंगे और दोनों अब ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका में अपना जीवन बिताएंगे। लोग वजह तलाशते रहे लेकिन हैरी इस बारे में हमेशा बहुत स्पष्ट रहे कि न तो वो ताज चाहते हैं और न ही कोई उपाधि। शाही गद्दी की कतार में प्रिंस हैरी छठे स्थान पर हैं। इससे पहले प्रिंस चाल्स, प्रिंस विलियम और उनके तीन बच्चे हैं। हैरी और मेगन को शाही परिवार के बंधन स्वीकार्य नहीं थे। दोनों अब स्वतंत्र जीवन जीना चाहते थे। बकिंघम पैलेस की ऊंची दीवाराें के भीतर रहना उनके ​लिए बर्दाश्त से बाहर हो चुका था। प्रिंस हैरी बचपन में ही अपनी मां डायना को खो चुके थे और उन्हें मीडिया की भीड़ पसंद नहीं थी।
आज दुनिया कितनी बदल गई है। नस्लभेद और रंगभेद को खत्म करने के लिए दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों में लम्बे आंदोलन चलाए गए। इन आंदोलनों में कितने लोगों ने अपनी जान दी, कितनों ने वर्षों की कैद काटी तब जाकर वहां लोकतंत्र की स्थापना हुई। रंगभेद विरोधी आंदोलन के चलते नेल्सन मंडेला को 27 वर्ष जेल में काटने पड़े थे। 
6 नवम्बर, 1913 के दिन महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीतियों के खिलाफ ‘द ग्रेट’ मार्च का नेतृत्व ​िकया था। आज भी अमेरिका और ब्रिटेन में रंगभेद की घटनाएं सामने आ रही हैं। रंगभेद नीति 1948 में बनी थी, इसका मकसद गोरों की नस्ली श्रेष्ठता के दम्भ पर आधारित नस्ली भेदभाव के कार्यक्रम पर अमल करना था। आधुनिक समाज में नस्लभेद स्वीकार्य नहीं लेकिन ब्रिटेन जैसे लोकतांत्रिक देश में राजशाही के प्रतीक को अपनी बहुमूल्य परम्परा मान कर क्यों ढोया जा रहा है, यह सवाल सबके सामने है। महलों के भीतर का जीवन रीति-रिवाजों और नियमों में बंधा हुआ होता है। ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों में राजपरिवार को विशेषाधिकार और संरक्षण दिया जाता है और यह सब वहां की सरकारें करती हैं। दुनिया में लगभग 44 संप्रभु राज्य हैं जिन पर राज्य के प्रमुख के रूप में राजा, रानी या राजकुमार का शासन है। ज्यादातर देशों में राजशाही संवैधानिक है लेकिन कुछ देशों में शासन पूरी तरह से निरंकुश है।
​ब्रिटेन में यह बात किसी से छिपी हुई नहीं कि शादी के बाद मेगन की छवि अगली शादी ग्लैमर गर्ल की बनाई जाने लगी थी। ब्रिटेन के अखबारों में उनके बारे में जबर्दस्त आर्टिकल छापे जाने लगे थे। यही नहीं उन्हें यह भी टिप्स दिए जाते थे कि वह अपना पो​लिश्ड लुक कैसे हासिल करे। मेगन न केवल मिश्रित नस्ल की थी, बल्कि वह अमेरिकी और तलाकशुदा भी थी, इसे लेकर भी गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। मेगन के खिलाफ एक अभियान चल पड़ा था। अपमान और प्रताड़ना की कुछ घटनाएं खुलेआम हुई थीं। 2007 में प्रिंस विलियम और डायना के तलाक की वजह भी मीडिया की घेराबंदी ही थी। मेगन मुखर और नारीवादी है, इसलिए उसने बकिंघम पैलेस छोड़ना ही बेहतर समझा। हैरी नहीं चाहते थे कि जाे उनकी मां के साथ हुआ वह मेगन के साथ हाे। राजघरानों के भीतर खतरनाक साजिशों की कहानियां तो बहुत सुनीं। आज के दौर में भी बकिंघम पैलेस के भीतर जो कुछ अनमोल परम्पराओं के नाम पर क्या हो रहा है, हैरानी तो होनी ही चाहिए। खानदान और परिवार की श्रेष्ठता से जुड़े सामंती मूल्यों पर यह एक धब्बा है। शाही खानदान की पीढि़यां बदल गईं ले​किन सामंती मूल्य नहीं बदले। अब शाही परिवारों में कितना गौरव देखा जाए, इसका​ फैसला लोगों को करना होगा।
facebook twitter instagram