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Baisakhi 2026: जब गुरु गोविंद सिंह जी ने रची खालसा की गाथा, जानें बैसाखी के गौरवशाली इतिहास की पूरी कहानी

02:51 PM Apr 14, 2026 IST | Khushi Srivastava
baisakhi 2026  जब गुरु गोविंद सिंह जी ने रची खालसा की गाथा  जानें बैसाखी के गौरवशाली इतिहास की पूरी कहानी
Baisakhi History and Significance(AI Generated)
Baisakhi History and Significance: सिख कैलेंडर के अनुसार, बैसाखी से ही सिख नववर्ष की शुरुआत होती है। यह दिन न केवल कैलेंडर बदलने का प्रतीक है, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और संकल्प भरने का अवसर भी है। इस साल ये पर्व आज यानी मंगलवार, 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है।
बैसाखी सिख समुदाय के लिए आस्था और गौरव का पर्व है। यह एक कृषि त्यौहार है जो मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। यह त्योहार रबी की फसल पकने की खुशी में मनाया जाता है। यह पर्व किसानों की मेहनत के फल का उत्सव है। कृषि प्रधान होने के साथ-साथ, इस दिन का अपना एक धार्मिक और गौरवशाली इतिहास भी है।

Baisakhi History and Significance: खालसा पंथ की स्थापना और गौरवशाली इतिहास

Baisakhi History and Significance
Baisakhi History and Significance (Source: Social Media)

सिख धर्म के लिए बैसाखी का दिन बहुत गर्व की बात है। इसी दिन साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में 'खालसा पंथ' की शुरुआत की थी। उन्होंने 'पंज प्यारों' को अमृत पिलाकर एक बहादुर समुदाय बनाया, जो कभी अन्याय के आगे नहीं झुकता।

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आज के दिन गुरुद्वारों में कीर्तन किए जाते हैं। सड़कों पर निकलने वाले नगर कीर्तन और पंज प्यारों की शान देखकर दिल खुश हो जाता है। यह त्योहार सच्चाई और सेवा के रास्ते पर चलने की सीख देता है।

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Baisakhi 2026: फसल की कटाई और खुशियों का जश्न

Baishakhi 2026
Baishakhi 2026 (Source: Social Media)
बैसाखी असल में प्रकृति को शुक्रिया कहने का पर्व है। जब खेतों में गेहूं की फसल तैयार हो जाती है, तो किसान खुशी से झूम उठते हैं। ढोल की आवाज पर भांगड़ा और गिद्धा पाकर वे अपनी कामयाबी का जश्न मनाते हैं। घरों में लजीज पकवान बनते हैं और लोग पुरानी कड़वाहट भूलकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। लंगर में साथ बैठकर खाना भाईचारे को बढ़ाता है। शाम को नाच-गाना और मस्ती हमें बताती है कि कड़ी मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।

पारंपरिक घर के पकवानों का स्वाद

मान्यता है कि बैसाखी के दिन किया गया दान बहुत फलदायी होता है। किसी भूखे को खाना खिलाना या प्यासे को पानी पिलाना सबसे नेक काम माना जाता है। इस दिन घरों में गुड़ वाले चावल और मीठी खीर जैसे पकवान बनते हैं, जिनका स्वाद ही निराला होता है। शुद्ध मन और प्यार से बनाया गया यह भोजन जब भगवान को चढ़ाया जाता है, तो घर में सुख-समृद्धि आती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अपनों का साथ और ईश्वर की कृपा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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