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फर्जी आईडी से बैंक खाते खोल विदेशों से लाखों का लेनदेन,एटीएस ने किए 14 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने फर्जी आईडी से खोले गये बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन कर आपराधिक गतिविधियों लिप्त 14 लोगों को आज गिरफ्तार किया,जिनमें पांच दिल्ली व नोएडा से गिरफ्तार किए है।
फर्जी आईडी से बैंक खाते खोल विदेशों से लाखों का लेनदेन,एटीएस ने किए 14 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने फर्जी आईडी से खोले गये बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन कर आपराधिक गतिविधियों लिप्त 14 लोगों को आज गिरफ्तार किया,जिनमें पांच दिल्ली व नोएडा से गिरफ्तार किए है। 
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने आज यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूचना प्राप्त हुई कि कुछ लोग आपराधिक षड़यन्त्र के तहत गिरोह बनाकर फर्जी आईडी के आधार पर विभिन्न बैंकों में ऑनलाइन खाते खोलकर अवैधानिक रूप से आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धनराशि का आदान-प्रदान कर आगे आपराधिक गतिविधियों के लिए उपयोग कर रहें हैं। 
उन्होंने बताया कि इस आसूचना के आधार पर प्रकाश में आये लोगों में नौ लोग सम्भल,मुरादाबाद और अमरोहा जबकि पांच को नोएडा से गिरफ्तार किया गया है,उनके नाम और पते नहीं बताये। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों में संभल निवासी मोहम्मद फहीम,सैंमलु हसन, हरिओम अरोड़,तरुण सूर्या, पीयूष वार्ष्णेय, प्रशान्त गुप्ता के अलावा मुरादाबाद निवासी प्रेम सिंह अमरोहा निवासी अंशुल गुप्ता को गिरफ्तार किया। इन लोगों के कब्जे से करीब 300 सिम बरामद की गई हैं। 
श्री कुमार ने बताया कि जुलाई 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक कुछ ऑनलाइन खोले गए खातों में संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली थी। एटीएस ने जांच शुरू की तो पता चला कि यह खाते फर्जी आईडी पर लिए गए सिमकार्ड की मदद से खोले गए। फर्जी आईडी पर निकाले गए सिमकार्ड की पड़ताल शुरू की तो पूरे मामले की परतें खुलने लगीं। गिरफ्तार प्रेम सिंह ने विभिन्न मोबाइल कंपनियों की 1500 प्री.एक्टीटिड सिम खरीदी और दिल्ली में लोगों को दिए हैं। इनमें कुछ विदेशी भी शामिल हैं। 
उन्होंने बताया कि नोएडा एवं दिल्ली से गिरफ्तार किये गये पांच लोगों को लखनऊ लाया जा रहा है। विदेशी अभियुक्तों के विरूद्ध लुक-आउट नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। इन लोगों से विस्तृत पूछताछ जारी है। आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जायेगा,जिससे इनके सहयोगियों के बारे में जानकारी की जा सके।
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