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चुनाव से पहले बंगाल में फिर उठा रोहिंग्या मुद्दा, दिलीप घोष ने की केंद्रीय बलों के तैनाती की मांग

दिलीप घोष ने कहा, 'हमें यकीन है कि बॉर्डर वाले इलाकों में रोहिंग्याओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। चुनाव आयोग को इसपर ध्यान देना चाहिए।'
चुनाव से पहले बंगाल में फिर उठा रोहिंग्या मुद्दा, दिलीप घोष ने की केंद्रीय बलों के तैनाती की मांग
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी अपने चरम पर है। राज्य की सत्ताधारी टीएमसी और बीजेपी के बीच किसी न किसी मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चलता रहता है। चुनाव आयोग की टीम इस समय बंगाल दौरे पर है। इस बीच चुनाव से पहले एक बार फिर रोहिंग्या का मुद्दा उठने लगा है। 
बंगाल बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष ने गुरुवार को चुनाव आयोग से कहा है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर लोगों में डर का माहौल है और इसलिए जल्द ही यहां केंद्रीय बलों की तैनाती होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'हमें यकीन है कि बॉर्डर वाले इलाकों में रोहिंग्याओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। चुनाव आयोग को इसपर ध्यान देना चाहिए।'

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घोष ने कहा, 'चुनाव आयोग की पूरी टीम यहां चुनावी तैयारियों का जायजा लेने पहुंची है। विपक्षी पार्टी के नाते, हमने उनसे राज्य में एक ऐसा माहौल सुनिश्चित करने को कहा है जहां लोग शांति और निष्पक्षता के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें। लोगों को निर्भय रूप से वोट देने का वातावरण बनाना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है।  
वहीं टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी ने चुनाव आयोग के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद आरोप लगाया कि "हमें जानकारी मिली है कि अर्धसैनिक बल के अधिकारी विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं और लोगों को एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में वोट डालने के लिए कह रहे हैं।" उन्होंने कहा, "यह खतरनाक स्थिति है और निर्वाचन आयोग को इसपर गौर करना चाहिए।"
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