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गृहमंत्री से मिले भाजपा प्रतिनिधिमंडल, हेमताबाद विधायक की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की

गृहमंत्री से मिले भाजपा प्रतिनिधिमंडल, हेमताबाद विधायक की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की
भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल में उत्तरी दिनाजपुर जिले के हेमताबाद के विधायक देबेंद्र नाथ रे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

भाजपा महासचिव व पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने शाह से आग्रह किया कि रे की मौत के मामले पर सीबीआई जांच बिठाई जाए।

देबेंद्र नाथ रे का शव सोमवार को उत्तर दिनाजपुर जिले के बिंदाल गांव में अपने घर के पास एक बंद दुकान के बाहर बरामदे की छत से लटका मिला था। उनके परिवार और प्रदेश भाजपा इकाई ने उनकी मौत को राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस द्वारा की गई ‘‘नृशंस हत्या’’ करार दिया है।

तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि इस आरोप का खंडन किया है। शाह से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में विजयवर्गीय ने कहा, ‘‘भाजपा के उत्थान से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बेचैन हैं। राज्य में पुलिस का अपराधीकरण हो गया है और शासन तंत्र पूरी तरह फेल हो गया है।’’ 

उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने देबेंद्र नाथ रे की मौत के सिलसिले में पश्चिम बंगाल पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने आरोप लगाया कि देबेंद्र नाथ रे के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘‘छेड़छाड़’’ की गई है और पुलिस तथा राज्य के गृह सचिव के बयान अलग-अलग हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। इसलिए इसकी सीबीआई जांच के लिए पहले हम राष्ट्रपति से मिले और अब गृह मंत्री से।’’ मंगलवार को जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि देबेंद्र नाथ रे की मृत्यु ‘‘फांसी लगने’’ के कारण हुई। शरीर पर कोई अन्य ‘‘चोट का निशान’’ नहीं पाया गया।

प्रतिनिधिमंडल में दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट और राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता भी शामिल थे। इससे पहले, भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और रे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग के साथ-साथ राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने और राष्ट्रपति कोविंद से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की।
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