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भाजपा ने कहा- विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप 'तथ्यों, साक्ष्यों' पर आधारित

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रतिशोध की राजनीति के आरोपों को मंगलवार को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप ‘‘तथ्यों और साक्ष्यों’’ पर आधारित हैं।
भाजपा ने कहा- विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप 'तथ्यों, साक्ष्यों' पर आधारित
 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रतिशोध की राजनीति के आरोपों को मंगलवार को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप ‘‘तथ्यों और साक्ष्यों’’ पर आधारित हैं। पार्टी ने कहा कि लोगों का पैसा ऐंठने वालों को खुला नहीं घूमने दिया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्थ चटर्जी की करीबी के पास से भारी 
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने सरकार पर लगे राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने शिवसेना सांसद संजय राउत पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्थ चटर्जी की करीबी के पास से भारी मात्रा में नकदी जब्त होने और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन पर लगे धनशोधन के आरोपों पर बात की। इन सभी नेताओं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गिरफ्तार कर चुका है।
पात्रा ने कहा कि राउत 2007 में 47 एकड़ के भूखंड की पुनर्विकास 
पात्रा ने कहा, ''वे बड़े नेता हैं, क्या इसलिए उन्हें खुला घूमने दिया जाए? उन पर लगे आरोप तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं, बयानबाजी पर नहीं। विपक्ष को भ्रष्टाचार का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।'' पात्रा ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि भाजपा नीत सरकार कभी भी संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन नहीं करेगी और न ही जांच एजेंसियों के कामकाज में दखल देगी। उन्होंने कहा, ''लेकिन हम भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करते। जिसने भी जनता के पैसे ऐंठे हैं, उसे बख्शा नहीं जाएगा।''    पात्रा ने कहा कि राउत 2007 में 47 एकड़ के भूखंड की पुनर्विकास परियोजना से संबंधित लगभग 1,040 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपी हैं।उन्होंने कहा कि इस संबंध में महाराष्ट्र आवास एवं विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने 2018 में मामला दर्ज किया था।
अदालत ने उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को 
पात्रा ने पूछा कि क्या ईडी को उनके खिलाफ इसलिए कार्रवाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह नेता हैं? उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने तब भी हंगामा किया था जब फरवरी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता नवाब मलिक को धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत नहीं दी और वह जेल में हैं। गौरतलब है कि विपक्ष मोदी सरकार पर संघीय एजेंसियों, विशेष रूप से ईडी का ''दुरुपयोग'' कर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहा है।

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