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Chandrayaan-5: भारत लहराएगा चांद पर परचम, ISRO को मिलेगा जापान की JAXA का सहयोग

07:35 PM Aug 29, 2025 IST | Himanshu Negi
chandrayaan 5  भारत लहराएगा चांद पर परचम  isro को मिलेगा जापान की jaxa का सहयोग
Chandrayaan-5

Chandrayaan-5: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रयान-5 मिशन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के बीच समझौते का स्वागत किया और कहा कि मिशन के अंतर्गत चंद्रयान-5, इसरो जाक्सा की एक संयुक्त पहल है जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव और चंद्रमा पर पानी सहित उसके छिपे हुए संसाधनों का अन्वेषण करना है। यह चंद्रयान श्रृंखला के चंद्र अभियानों का पाँचवाँ मिशन होगा।

Chandrayaan-5
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PM Modi in Japan

जापान के शिगेरु इशिबा के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि हम चंद्रयान-5 मिशन के लिए इसरो और जाक्सा के बीच सहयोग का स्वागत करते हैं। हमारी सक्रिय भागीदारी पृथ्वी की सीमाओं से परे चली गई है और अंतरिक्ष में मानव जाति की प्रगति का प्रतीक बन जाएगी। बता दें कि इसरो और जापान के बीच संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन (LUPEX) के समझौते में भारत और जापान के बीच सहयोग के नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं।

Chandrayaan-5
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Chandrayaan-5

वर्ष 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग को मिली वैश्विक प्रशंसा का उल्लेख करते हुए PM मोदी ने कहा कि अगली चुनौती चंद्र सतह के गहन अन्वेषण में है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां जल बर्फ जैसे महत्वपूर्ण संसाधन मौजूद हो सकते हैं। इस मिशन में जापानी तकनीक और भारतीय प्रतिभा एक सफल संयोजन हैं। साथ ही हम हाई-स्पीड रेल पर काम कर रहे हैं और नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप के तहत बंदरगाहों, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से प्रगति करेंगे।

Chandrayaan-5 Mission Launch

चंद्रयान 5 मिशन को JAXA द्वारा अपने H3-24L प्रक्षेपण यान के माध्यम से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसमें इसरो निर्मित चंद्र लैंडर होगा, जो जापान निर्मित चंद्र रोवर को ले जाएगा। इसरो, चंद्र लैंडर के विकास के अलावा, मिशन के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरण विकसित करने के लिए भी जिम्मेदार है। चंद्रयान-5 लूपेक्स मिशन भारत के चंद्र अन्वेषण अभियान में प्रमुख मील के पत्थरों में से एक होगा, जिसमें वर्ष 2040 तक भारतीय गगनयात्रियों के चंद्रमा पर उतरने की परिकल्पना की गई है।

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