बारनावापारा अभयारण्य बंद, लेकिन पर्यटन नहीं थमेगा, बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया 'बारनावापारा-सिरपुर पर्यटन सर्किट'
Barnawapara Sirpur Tourism Circuit: मानसून के दौरान वन्यजीवों के सुरक्षित प्रजनन और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य को 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है, लेकिन पर्यटकों के उत्साह को बनाए रखने के लिए एक नई और आकर्षक पहल की गई है।
पर्यटन विकास के साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट: द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस विशेष पर्यटन परिपथ का उद्देश्य रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को एक ही सर्किट से जोड़कर पर्यटकों को नया अनुभव प्रदान करना है। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेगी।
ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों का अनूठा संगम
नए पर्यटन सर्किट में सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत, धसकुंड जलप्रपात की प्राकृतिक छटा, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर की सांस्कृतिक पहचान, गिरौदपुरी धाम की धार्मिक आस्था, सिद्धखोल जलप्रपात का मनोरम दृश्य, सोनाखान का ऐतिहासिक महत्व, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर स्थित देव हिल्स ईको एथनिक स्टे तथा कोडार जलाशय सहित अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया है। इन स्थलों पर पर्यटक घने जंगलों, पहाड़ियों, झरनों, वन क्षेत्र, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम देख सकेंगे।
इन्फ्लुएंसर्स और फोटोग्राफर्स के जरिए पर्यटन को बढ़ावा
मानसून के मौसम में पूरा इलाका हरियाली की चादर से ढक जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम में पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
वन विभाग इस पर्यटन सर्किट को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। इसके लिए देशभर के टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिल सके। इस पहल का उद्देश्य जिम्मेदार एवं सतत पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
बारनावापारा-सिरपुर में सतत पर्यटन की नई शुरुआत
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के बावजूद पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।
यह नई पर्यटन पहल साबित करती है कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। मानसून में जहां अभयारण्य के वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में रहेंगे, वहीं पर्यटकों को भी छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू होने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
रिपोर्ट -आनंद खरे

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