छत्तीसगढ़ में पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत प्रदेश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की तैयारी, 70 से 80 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
Chhattisgarh EV Infrastructure: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं से ऐसे उपयुक्त स्थानों की जानकारी मांगी है, जहां सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकें।
यह पहल केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत की जा रही है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मजबूत चार्जिंग अवसंरचना तैयार करना है। योजना के तहत चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में 70 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है।
25 से 30 नए चार्जिंग स्टेशन बनने की संभावना
सरकारी अनुमान के अनुसार नगर निगम क्षेत्रों में दोपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लगभग 25 से 30 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय निकायों को संभावित स्थलों का चिन्हांकन कर विस्तृत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
ईवी क्रांति की सबसे बड़ी जरूरत: चार्जिंग सुविधा
देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद पर्याप्त चार्जिंग सुविधाओं का अभाव सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत हुए बिना ईवी को बड़े पैमाने पर अपनाना संभव नहीं होगा। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक चार्जिंग अवसंरचना के विकास पर विशेष जोर दे रही हैं।
अनुदान से कम होगा आर्थिक बोझ
योजना के तहत 'बी' श्रेणी के नगर निगम क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशनों के लिए विद्युत अधोसंरचना (अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर) की लागत का 80 प्रतिशत तथा चार्जिंग मशीनों एवं उपकरणों की लागत का 70 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रस्ताव है। शेष राशि संबंधित नगरीय निकायों को जुटानी होगी। इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी।
इन स्थानों को मिलेगी प्राथमिकता
विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन ऐसे स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे जहां पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो और आम लोगों की पहुंच आसान हो। बस स्टैंड, प्रमुख बाजार क्षेत्र, अस्पताल परिसर, सार्वजनिक पार्किंग स्थल और सरकारी भूमि को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित स्थानों पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध हो या आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।
चार्जिंग स्टेशन के लिए तय होंगे मानक
प्रत्येक प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशन के लिए लगभग 800 वर्गफुट भूमि की आवश्यकता होगी। वहीं स्टेशन की न्यूनतम कुल क्षमता 144 किलोवाट रखने का प्रस्ताव है, ताकि एक साथ कई वाहनों को चार्ज किया जा सके। अंतिम चयन से पहले स्थल की व्यवहार्यता और उपयोगिता का विस्तृत परीक्षण भी किया जाएगा।
हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विकास लोगों के बीच ईवी के प्रति भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि यह पहल पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
रिपोर्ट: रायपुर, आनंद खरे/पंजाब केसरी

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