छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति: निवेश, पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि की नई राह
Chhattisgarh New Excise Policy 2026-27: छत्तीसगढ़ सरकार की नई आबकारी नीति राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने, राजस्व बढ़ाने और शराब उद्योग से जुड़े व्यवसायों के लिए बेहतर एवं पारदर्शी वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिनका उद्देश्य उद्योगों को बढ़ावा देना और निवेशकों का विश्वास मजबूत करना है। नई आबकारी नीति इसी व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।
नई नीतियों से छत्तीसगढ़ में बढ़ेगा औद्योगिक निवेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि छत्तीसगढ़ को निवेश और उद्योग के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नीतियां आवश्यक हैं। नई आबकारी नीति के माध्यम से सरकार ने प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने और उद्योग जगत को अधिक सुविधाजनक कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। इससे राज्य में नए निवेश आकर्षित होने के साथ-साथ मौजूदा उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
2026-27 के लिए आबकारी विभाग की बड़ी तैयारी
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में विभाग ने वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति तैयार करते समय उद्योग जगत, आसवनी संचालकों, बॉटलिंग इकाइयों और अन्य हितधारकों से व्यापक सुझाव प्राप्त किए। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें व्यवसाय संचालन सुगम हो, निवेशकों को अनावश्यक प्रशासनिक जटिलताओं का सामना न करना पड़े और राजस्व संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बने।
नई नीति से लाइसेंस, आपूर्ति व्यवस्था और दर निर्धारण हुआ और भी आसान
नई नीति के तहत लाइसेंस प्रक्रिया, ऑनलाइन अनुमतियों, दर निर्धारण, आपूर्ति व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देशी एवं विदेशी मदिरा की आपूर्ति, दर निर्धारण तथा दुकानों के व्यवस्थापन संबंधी अनेक निर्देश जारी किए गए हैं, जिनसे नीति के व्यवस्थित क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा रहा है।
आबकारी आयुक्त पी.एस.एल्मा विभागीय स्तर पर इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में विभाग डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन प्रक्रियाओं, आपूर्ति तंत्र की पारदर्शिता तथा राजस्व प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
डिजिटल निगरानी से अवैध कारोबार पर कसेगा शिकंजा
नई आबकारी नीति से राज्य में डिस्टिलरी, बॉटलिंग प्लांट, पैकेजिंग इकाइयों, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि प्रक्रियागत सरलीकरण से निवेश की लागत कम होगी और कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी। इसके साथ ही नई इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
राज्य सरकार का मानना है कि आबकारी क्षेत्र केवल राजस्व का स्रोत नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए नई नीति में पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और निवेशक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है। अवैध कारोबार पर नियंत्रण, डिजिटल निगरानी और सुव्यवस्थित आपूर्ति प्रणाली के माध्यम से सरकार राजस्व वृद्धि के साथ-साथ सुशासन को भी मजबूत करना चाहती है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की औद्योगिक विकास की सोच, आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के विभागीय नेतृत्व और आबकारी आयुक्त पदुम सिंह एल्मा की प्रशासनिक निगरानी में लागू की जा रही नई आबकारी नीति छत्तीसगढ़ में निवेश, उद्योग विस्तार और राजस्व वृद्धि के नए अवसर पैदा करती दिखाई दे रही है। आने वाले वर्षों में यह नीति राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट- आनंद खरे

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