जिंदल स्टील को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने 153.55 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक
Chhattisgarh News in Hindi : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) को बड़ी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा जारी 153.55 करोड़ रुपये की वसूली नोटिस पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने माना कि मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया और प्रभावित पक्ष को पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष पर भारी वित्तीय दायित्व डालने से पहले उसे प्रभावी और न्यायसंगत सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है। न्यायालय ने पाया कि प्रारंभिक स्तर पर जिंदल स्टील को पक्षकार बनाए बिना कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
Chhattisgarh High Court Order : चार माह में नए सिरे से सुनवाई के निर्देश
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) को निर्देश दिया है कि वह मामले की नए सिरे से सुनवाई कर चार माह के भीतर निर्णय दे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जिंदल स्टील को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले। तब तक 153.55 करोड़ रुपये की वसूली संबंधी सभी कार्रवाई पर रोक रहेगी।
Power Purchase Agreement Dispute : 2011 के बिजली खरीद समझौते से जुड़ा है विवाद
यह विवाद वर्ष 2011 में जिंदल स्टील और CSPDCL के बीच हुए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) से जुड़ा है। इसके तहत जिंदल ने अपने कैप्टिव पावर प्लांट से राज्य को बिजली की आपूर्ति की थी। बाद में टैरिफ निर्धारण से जुड़े आदेशों और अपीलीय विद्युत अधिकरण (APTEL) के फैसलों के आधार पर CSPDCL ने कंपनी को 153.55 करोड़ रुपये लौटाने का नोटिस जारी किया था।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के अधिकार को माना अहम
जिंदल स्टील की ओर से दलील दी गई कि जिन आदेशों के आधार पर वसूली की कार्रवाई की गई, उनमें कंपनी को पक्षकार नहीं बनाया गया था। वहीं CSPDCL का कहना था कि सार्वजनिक सूचना पर्याप्त थी और कंपनी को प्रक्रिया की जानकारी थी। हालांकि अदालत ने CSPDCL के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जिंदल इस मामले में आवश्यक पक्षकार था क्योंकि आदेश का सीधा प्रभाव उसके संविदात्मक और वित्तीय अधिकारों पर पड़ रहा था।
फिलहाल राहत, अंतिम फैसला बाकी
हाईकोर्ट के इस फैसले से जिंदल स्टील को तत्काल राहत मिल गई है, लेकिन विवाद का अंतिम निपटारा अभी बाकी है। अब सभी पक्षों की सुनवाई के बाद CSERC नए सिरे से मामले का परीक्षण करेगा। इस निर्णय को प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।

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