हसदेव अरण्य में कोल उत्खनन पर अपना रुख स्पष्ट करे साय सरकार : कांग्रेस
Hasdeo Aranya Mining Controversy : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार से अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह हसदेव अरण्य के जंगलों की रक्षा करेगी या केंद्र सरकार द्वारा दी गई खनन संबंधी अनुमति के पक्ष में खड़ी होगी।
Congress Targets Vishnu Deo Sai : सरकार दे रही कोर्पोरेट हितों को प्राथमिकता
शुक्ला ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने उद्योगपति गौतम अडानी के हितों के विरुद्ध कोई निर्णय नहीं लिया है। इससे यह संदेश जा रहा है कि भाजपा सरकार राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय हितों की अपेक्षा कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरगुजा क्षेत्र के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में खनन की अनुमति दिए जाने से न केवल घने वन क्षेत्र प्रभावित होंगे, बल्कि रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और भगवान श्रीराम के वनगमन पथ से जुड़ी ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों पर भी संकट मंडरा सकता है।
Chhattisgarh Forest Conservation Debate : कटेंगे 5 लाख से अधिक पेड़
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में परिवर्तित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजा गया है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति मिलती है तो पांच लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य को मध्य भारत का "लंग्स ज़ोन" माना जाता है और इसकी जैव विविधता पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आदिवासियों की आजीविका प्रभावित
शुक्ला ने कहा कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से नए खनन प्रोजेक्टों का विरोध कर रहे हैं। हरैया, फतेहपुर, साल्ही और हर्रई सहित अनेक गांवों के ग्रामीण एवं आदिवासी संगठन लगातार आंदोलनरत हैं। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर खनन से जंगल, जलस्रोत, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका प्रभावित होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं और स्थानीय समुदायों की आपत्तियों के बावजूद सरकार उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि राज्य सरकार इस पूरे मामले पर अपना स्पष्ट पक्ष रखे और हसदेव अरण्य के पर्यावरणीय तथा सामाजिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
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