प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, नवा रायपुर बनेगा ‘पीपल सिटी’, विश्व पर्यावरण दिवस पर मंत्री ओ.पी. चौधरी ने दिए हरित भविष्य के संकेत
O.P. Choudhary On World Environment Day 2026: रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है और सतत विकास का मार्ग भी इसी सोच से होकर गुजरता है। राजधानी रायपुर में आयोजित संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी, तकनीक और जागरूकता को सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
प्रकृति के संतुलन के बिना विकास संभव नहीं: O.P. Choudhary

मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए बिना विकास संभव नहीं है। भारतीय परंपरा सदियों से प्रकृति के संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देती रही है, इसलिए आधुनिक विकास मॉडल को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया है। औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन की ऑनलाइन निगरानी, फ्लाई ऐश परिवहन की जीपीएस ट्रैकिंग तथा खतरनाक अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
Peepal City Nava Raipur: ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित होगा नवा रायपुर

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक विषय नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की घोषणा रही। मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के वृक्ष लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उनका कहना था कि पीपल, नीम और अन्य देशी वृक्ष केवल हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों और ईको क्लब समन्वयकों से बच्चों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का आग्रह करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। साथ ही युवाओं को सर्कुलर इकोनॉमी, हरित तकनीक, अपशिष्ट प्रबंधन और सस्टेनेबिलिटी आधारित स्टार्टअप्स में करियर की संभावनाओं को तलाशने की सलाह दी।
प्रदर्शनी और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण विषयक प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक, प्रशिक्षण सत्र और पुरस्कार वितरण जैसे विविध आयोजन हुए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, विद्यालयों और ईको क्लबों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रकाशनों का भी लोकार्पण किया गया।
Report: रायपुर,आनंद खरे/पंजाब केसरी

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