सुकमा में तीन साल का सफल कार्यकाल पूरा कर बालोद रवाना हुए SP किरण चव्हाण, नक्सल मोर्चे से जनविश्वास तक छोड़ी मजबूत छाप
Sukma Anti Naxal Operation : राज्य सरकार की ओर से जारी पुलिस अधिकारियों की तबादला सूची में सुकमा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण चव्हाण का स्थानांतरण बालोद कर दिया गया है। करीब तीन वर्षों तक सुकमा में सेवाएं देने के बाद उनके तबादले को जिले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित जिले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए।
नक्सर विरोधी अभियानों को मिली धार
एसपी चव्हाण के नेतृत्व में नक्सल विरोधी अभियानों को नई धार मिली। संयुक्त अभियान के जरिए कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, अनेक नक्सली गिरफ्तार हुए तथा बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए। लगातार अभियान चलाकर नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी दबाव बनाया गया, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल भी मजबूत हुआ।
उनके कार्यकाल में पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनसंपर्क और सामुदायिक पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी। दूरस्थ गांवों में पुलिस-जन संवाद, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल तथा नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय ने पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाया। बेहतर सुरक्षा वातावरण का असर विकास कार्यों पर भी दिखाई दिया, जहां सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के विस्तार को गति मिली।
अनुशासित और संवेदनशील
सुकमा में लंबे समय तक उनके साथ कार्य कर चुके अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें अनुशासित, संवेदनशील और प्रेरणादायी अधिकारी बताया। एसडीओपी परमेश्वर तिलकवार ने कहा कि वे गलतियों पर डांटने के बजाय समझाकर बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते थे। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश जैन ने उनके नेतृत्व, रणनीतिक सोच और जनसेवा की भावना की सराहना की।
बालोद के लिए स्थानांतरित हो रहे एसपी किरण चव्हाण अपने पीछे ऐसा कार्यकाल छोड़कर जा रहे हैं, जिसे नक्सल मोर्चे पर प्रभावी रणनीति, बेहतर पुलिसिंग और जनविश्वास कायम करने के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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