Teejan Bai Passed Away: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर AIIMS में ली आखिरी सांस
छत्तीसगढ़ की लोक कला को नई पहचान दिलाने वाली और महाभारत की गाथाओं को अपनी कड़कड़ाती आवाज से सात समंदर पार पहुंचाने वाली डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया है। पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई ने 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। पिछले कुछ समय से वह गंभीर रूप से बीमार चल रही थी, शनिवार देर रात (3.15 बजे) रायपुर एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली। रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के PRO ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनके जाने से कला जगत में शोक का माहौल है।
2024 में आया पैरालिसिस अटैक
मिली जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले कुछ समय से कई बीमारियों से जूझ रही थी। साल 2024 में उन्हें पैरालिसिस अटैक आया था। कुछ हफ्ते पहले उनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था। रविवार सुबह अचानक उनकी हालत बिगड़ी और 3:15 बजे आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर फैली, कई बड़े नेता और कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
PM मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया शोक व्यक्त
प्रधामंत्री मोदी ने सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!"
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, "प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रसार करने में उनका अमूल्य योगदान स्मरणीय रहेगा। मैं उनके प्रियजनों और प्रशंसकों के प्रति गहन संवेदनाएं व्यक्त करती हूं।"
13 साल की उम्र में पंडवानी गाना शुरू किया

तीजन बाई का जन्म 1956 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में पंडवानी गाना शुरू कर दिया था। उस समय में पंडवानी की ‘कापालिक शैली' पर सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था। लेकिन उस दौर में भी तीजन बाई ऐसी पहली महिला थी जिन्होंने खड़े होकर और हाथ में तंबूरा लेकर दमदार आवाज में मंच पर परफॉर्म करना शुरू किया। इस वजह से उन्हें परिवार और समाज से विरोध का सामना करना पड़ा। जब वह मंच से गाना शुरू करती, सब मंत्रमुग्ध हो जाते।
तीन पुरस्कारों से सम्मानित

अपने पांच दशक के करियर में तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की माटी की इस कला को देश-दुनिया के कई कोनों तक पहुंचाया। इसके लिए भारत सरकार ने उन्हें कई पुरस्कार दिए हैं। इसमें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण शामिल है।

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