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रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, बोले- हमारी सांस्कृतिक विरासत विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ की पहचान

05:24 PM Jun 30, 2026 IST | Shivangi Shandilya
रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  बोले  हमारी सांस्कृतिक विरासत विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ की पहचान
Vishnu Deo Sai on Chhattisgarh Heritage

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन कर इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेखों, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी निरीक्षण किया।

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रामगढ़ महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

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छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के लिए भी विश्व स्तर पर विशेष पहचान रखता है। रामगढ़ जैसी विरासतें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं। इनका संरक्षण, संवर्धन और भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित हस्तांतरण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार तथा आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

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रामगढ़: संस्कृति, इतिहास और पर्यटन का अनूठा संगम

Chhattisgarh Tourism

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और इतिहास का जीवंत अध्याय है। यह क्षेत्र उन गौरवशाली परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने भारतीय सभ्यता को समृद्ध बनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य कला, शिलालेख और चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका प्रसिद्ध आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक और साहित्यिक स्मृति को जीवित रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

विश्व की प्राचीनतम नाट्यशालाओं में शामिल सीताबेंगरा गुफा

लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच को विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में गिना जाता है। वहीं जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा प्राचीन अभिलेख भारतीय कला और संस्कृति के विकास की महत्वपूर्ण गाथा प्रस्तुत करते हैं। यही विशेषताएँ इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग भी है प्रमुख आकर्षण

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अद्वितीय संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के प्रभाव से इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएँ पूरे क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक तथा ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं।

रामायणकालीन परंपराओं से भी जुड़ा है रामगढ़

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रामगढ़ क्षेत्र का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन—चारों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से न केवल इस गौरवशाली विरासत का संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का भी सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

रिपोर्ट: आशीष शर्मा

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Shivangi Shandilya

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शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।

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