मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 64वें सम्मेलन का किया शुभारंभ

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय एवं राज्यों के दो दिवसीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के 64 वें सम्मेलन का पटना में उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण, जल का संरक्षण एवं हरियाली को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों से भावी पीढ़ी को काफी लाभ होगा। 

पटना स्थित बिहार म्यूजियम सभागार में केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के दो दिवसीय 64वें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नीतीश ने कहा कि आज से 28 वर्ष पहले अविभाजित बिहार में 1992 में इसका आयोजन किया गया था। दो दिवसीय इस सम्मेलन में प्रदूषण की स्थिति, पर्यावरण संकट से संबंधित विभिन्न बिंदुओं और उसके समाधान पर चर्चा होगी। 

उन्होंने कहा कि हमलोग राज्य में पर्यावरण संकट, प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रहे हैं। हाल ही में इस विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन पटना में हुआ था। नीतीश ने कहा कि देश भर में इस विषय पर काम हो रहे हैं। इसके लिए कानून भी बनाए गए हैं। राज्य भी प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए कोशिश कर रहे हैं। बिहार भी इस बात को लेकर काफी सजग है। उन्होंने कहा कि राज्य के तीन शहरों को प्रदूषण के लिए चिन्हित किया गया था उस पर भी हमलोगों ने बैठक कर चर्चा की है। वाहन प्रदूषण की रोकथाम के लिए पंद्रह वर्ष के पुराने डीजल वाहनों के परिचालन को बंद करने का निर्णय लिया गया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई माह में हमने खुद इलेक्ट्रिक वाहन से पटना में सफर शुरु किया है। उपमुख्यमंत्री, कुछ मंत्री एवं कुछ वरीय पदाधिकारी को भी इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन के प्रयोग से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कानून बनाए गए हैं लेकिन सबसे बड़ी जरुरत लोगों को इसके बारे में जानकारी देने की है, उन्हें जागरुक करने की है। लोगों के जागरुक होने से भी कानून का ठीक ढंग से पालन हो पाता है। 

नीतीश ने कहा कि यहां विकास के कार्य किए जा रहे हैं। बिहार की आबादी तो अधिक है साथ ही उनकी जरुरतें भी बढ़ रही हैं। लोगों की आमदनी बढ़ रही हैं। सड़कें अच्छी होने से गाड़ियों की संख्या बढ़ी है और इससे वाहन प्रदूषण भी बढ़ा है। हमलोग पर्यावरण के अनुकूल विकास के कार्य की योजना बनाते हुए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के बंटवारे के बाद हरित आवरण नौ प्रतिशत था, सरकार में आने के बाद हरियाली मिशन की शुरूआत कर 19 करोड़ पौधे लगाए गए। राज्य की संस्थाओं के अध्ययन से पता चलता है कि राज्य का हरित आवरण क्षेत्र 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है और इसे आगे बढ़ाने के लिए भी हमलोग काम कर रहे हैं। 

नीतीश ने कहा कि हरियाली बढ़ाने के लिए आठ करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। भूजल स्तर को संरक्षित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम किया जा रहा है। सम्मेलन को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सीके मिश्रा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष एसपी सिंह परिहार, समेत अन्य अधिकारियों ने संबोधित किया। 
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