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पंजाब में ‘नो-फीस’ अभियान के अंतर्गत बच्चों और अभिभावकों ने स्कूलों के विरूद्ध एक बार फिर खटखटाई थालियां

पंजाब में ‘नो-फीस’ अभियान के अंतर्गत बच्चों और अभिभावकों ने स्कूलों के विरूद्ध एक बार फिर खटखटाई थालियां
 लुधियाना : साल 2020-21 के लिए पंजाब के अलग-अलग प्राइवेट स्कूलों में लिए जाने वाली फीस के विरूद्ध आज बच्चों और अभिभावकों ने समूह बनाकर ‘नो-फीस’ अभियान की शुरूआत की है। इस दौरान संपन्न और मध्यम परिवारों से जुड़े लोगों ने हाथों में चम्मच और थालियां खटखटाकर बजाई। कोरोना के खोफ के साएं में जी रहे अभिभावकों को घटती आमदन और बढ़ते खर्चे को देखते हुए इसकी शुरूआत की गई है। लुधियाना के अलग-अलग घरों की छतों, नजदीकी सडक़ों और चोराहों पर 10 मिनट तक बजी थालियां एवं पोस्टरों के साथ रोष प्रदर्शन किया गया। पेरेंटस एसो. पंजाब की ओर से केंद्र और प्रदेश सरकार से इस चालू वर्ष के लिए सभी स्कूलों -कालेजों की फीस एवं अन्य खर्च को छात्रों से पूर्ण रूप से ना लिए जाने की मांग की गई।
पेरेंटस एसो. के संयोजक एडवोकेट केजी शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सभी स्कूल-कालेजों को मूलभूत खर्चे के लिए विशेष आर्थिक पैकेज दे ताकि स्कूल के प्रबंधक भी अध्यापकों और अन्य सेवादारों को आर्थिक सहायता कर सकें। एसो. के सदस्यों ने कोरोना महामारी के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेद्र सिंह और शिक्षा मंत्री विजय इंद्र ङ्क्षसगला को मांगपत्र भेजकर छात्रों और अभिभावकों को आ रही परेशानियों के बारे में अवगत कराया। रोष प्रकट करने वालों के मुताबिक पूरे देश में व्यावसायिक गतिविधियां बंद है, जिसके चलते आम जनता के लिए गंभीर स्थिति बनी हुई है और बिना किसी कमाई के दिन-प्रतिदिन घरेलू खर्चे पूरे करने मुश्किल है। ऐसे में पढ़ाई कैसे हो? उसकी चिंता बनी हुई है। चूंकि यह मामला बच्चों के भविष्य का है, इसलिए पूर्ण फीस माफ की जानी चाहिए।
स्मरण रहे कि पंजाब के शिक्षामंत्री विजयइंद्र सिंगला ने भी स्कूल प्रबंधकों को अन्य खर्चे छोडक़र सिर्फ टयूशन फीस वह भी मासिक आधार पर लिए जाने की हिदायतें दी है।

- रीना अरोड़ा
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