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11वें दौर की बैठक से पहले चीन का बयान- भारत के प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा, सीमा पर स्थिति स्पष्ट

चीन ने शुक्रवार को कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के 11वें दौर की संभावना के बारे में खबरों के बीच कहा कि पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली शेष जगहों से सैनिकों की वापसी पर भारत के साथ वार्ता करने में कोई देरी नहीं की जा रही है।
11वें दौर की बैठक से पहले चीन का बयान- भारत के प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा, सीमा पर स्थिति स्पष्ट
चीन ने गुरुवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 की यथास्थिति की बहाली के लिए भारत के प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच अगली बैठकों में चर्चा हो सकती है। चीन ने शुक्रवार को कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के 11वें दौर की संभावना के बारे में खबरों के बीच कहा कि पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली शेष जगहों से सैनिकों की वापसी पर भारत के साथ वार्ता करने में कोई देरी नहीं की जा रही है।
पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर आगे की चर्चा के लिए चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की बैठक के 11वें दौर के लिए तिथि की पुष्टि के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने यहां एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि ‘‘चीन और भारत 11वें दौर की वार्ता आयोजित करने के लिए संपर्क में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आगामी वार्ता के लिए विशिष्ट तिथि के रूप में, मुझे कोई जानकारी नहीं है।’’
प्रवक्ता ने 11वें दौर की वार्ता आयोजित करने में किसी तरह के विलंब से भी इनकार किया। झाओ ने कहा, ‘‘बैठक में कोई विलंब नहीं किया जा रहा है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति बहुत स्पष्ट हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण सहमति के आधार पर भारतीय पक्ष चीन के साथ काम करेगा।’’
उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति की बहाली के लिए भारत के प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच अगली बैठकों में चर्चा हो सकती है। दिल्ली से खबरों में कहा गया है कि दोनों सेनाओं के कोर कमांडरों की बैठक शुक्रवार को हो सकती है और इसमें पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाले शेष स्थानों में सैनिकों की वापसी पर चर्चा हो सकती है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए आवश्यक है।
भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगोंग सो (झील) इलाके में पिछले वर्ष पांच मई को हिंसक संघर्ष के बाद सीमा गतिरोध उत्पन्न हो गया था। इसके बाद दोनों पक्षों ने बड़ी संख्या में सैनिकों एवं भारी हथियारों की तैनाती की थी। सैन्य एवं राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने इस वर्ष फरवरी में पैंगोंग सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सैनिकों एवं हथियारों को पीछे हटा लिया था। इसके बाद ही 20 फरवरी को सैन्य स्तर की वार्ता हुई थी। इसमें भारत ने देपसांग, हॉटस्प्रिंग और गोगरा समेत अन्य लंबित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया था।

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