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CM अशोक गहलोत बोले- प्रदेश में टिड्डी चेतावनी संगठन को मजबूत करे केन्द्र

राजस्थान के सीमांत जिलों में टिड्डी आक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने राज्य में टिड्डी चेतावनी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की मांग केंद्र सरकार से की है। गहलोत शुक्रवार को टिड्डी नियंत्रण को लेकर प्रदेश के सीमावर्ती जिलाधिकारियों, टिड्डी चेतावनी संगठन एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से चर्चा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि करीब तीन दशक के बाद फिर से टिड्डियों के लगातार आक्रमण शुरू होने से यह जरूरी हो गया है कि राज्य में टिड्डी चेतावनी संगठन को और अधिक मजबूत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि टिड्डियों के प्रकोप के कारण बीते साल भी किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था।

इस साल पहले की अपेक्षा टिड्डियों का आक्रमण अधिक तीव्र होने की आशंका है ऐसे में हमें पूरी मुस्तैदी से इस चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंस में भी इस मामले पर ध्यान आकर्षित किया गया था।

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चूंकि टिड्डी चेतावनी संगठन का कार्य केन्द्र के अधीन है ऎसे में केन्द्र सरकार इसे और अधिक मजबूत करे तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार टिड्डी का आक्रमण बदले रूप में सामने आया है। टिड्डियों के कुछ दल सीमावर्ती जिलों से अजमेर, जयपुर, करौली, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर सहित अन्य जिलों में पहुंच गए हैं और हमें इन्हें नियंत्रित करने के लिए नए तौर-तरीकों से काम करना होगा।

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि 11 अप्रैल को प्रदेश मंर पाकिस्तानी सीमा से प्रवेश के बाद टिड्डियों के छोटे समूह अन्य जिलों में भी पहुंच गए हैं। इनसे करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि इस समय पश्चिम राजस्थान के जिलों में फसलों का समय नहीं होने से किसानों को अधिक नुकसान नहीं हुआ है।

राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी ने कहा कि अफ्रीकन देशों में टिड्डियों का अत्यधिक प्रजनन हो रहा है। बड़ी संख्या में इन दलों के प्रदेश में पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ टिड्डी नियंत्रण के लिए जनसहभागिता जरूरी है। कृषि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव ने कहा कि पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में पहली बार टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ है। सिंचित क्षेत्र होने के कारण यहां अभी जायद की फसलें हो रही हैं और ऐसे में इन फसलों को नुकसान की संभावना है।
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