+

भारत जैसे बड़े देश में होनी चाहिए 4 राजधानी, इतिहास बदलने की कोशिश में केंद्र : CM ममता

मुख्यमंत्री ने शनिवार को कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के पैतृक आवास का औचक दौरा किया। यहां उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' घोषित करने के निर्णय की जमकर आलोचना की।
भारत जैसे बड़े देश में होनी चाहिए 4 राजधानी, इतिहास बदलने की कोशिश में केंद्र : CM ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शनिवार को यहां एक भव्य जुलूस की शुरुआत की। शहर के उत्तरी हिस्से में स्थित श्याम बाजार क्षेत्र में जुलूस की शुरुआत करने से पहले बनर्जी ने शंखनाद किया। सवा बारह बजे सायरन भी बजाया गया, 23 जनवरी 1897 को इसी समय बोस का जन्म हुआ था।
भारत जैसे बड़े देश के लिए 4 राष्ट्रीय राजधानी होनी चाहिए
बनर्जी ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि हम हम नेताजी की जयंती केवल उन वर्षों में ही मनाते हों जिस वर्ष चुनाव होने वाले हैं। उनकी 125वीं जयंती हम बहुत बड़े पैमाने पर मना रहे हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नेताजी को देशनायक बताया था। इसलिए हमने इस दिन को देशनायक दिवस बनाने का फैसला किया है।’’ उन्होंने कहा कि  कहा कि भारत जैसे बड़े देश के लिए 4 राष्ट्रीय राजधानी होनी चाहिए। 
केंद्र सरकार द्वारा 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' घोषित करने के निर्णय की जमकर ममता ने की आलोचना
उन्होंने कहा, ‘‘नेताजी देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। वह एक महान दार्शनिक थे।’’ मुख्यमंत्री ने शनिवार को कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के पैतृक आवास का औचक दौरा किया। यहां उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' घोषित करने के निर्णय की जमकर आलोचना की।
देशनायक दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं - क्योंकि रवींद्रनाथ टैगोर नेताजी को इसी नाम से बुलाते थे
उन्होंने कहा कि मैं पराक्रम दिवस का अर्थ नहीं समझती हूं। हमलोग इस दिवस को 'देशनायक दिवस' के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा, क्या आप जानते हैं कि हमलोग इस दिन को देशनायक दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं - ऐसा इसलिए है क्योंकि रवींद्रनाथ टैगोर नेताजी को इसी नाम से बुलाते थे। नेताजी को भावनाओं के साथ समझा जाना चाहिए। बहुत कम लोग ऐसे थे जिन्हें अपनी मातृभूमि से उतना ही प्रेम था, जितना कि नेताजी को था। हालांकि हमलोगों को उनकी जन्मतिथि के बारे में तो पता है, लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर विस्तृत जानकारी से हम अनभिज्ञ हैं।
हम केवल चुनाव से पहले नेताजी को याद नहीं करते
बनर्जी ने योजना आयोग को खत्म करने के लिए शनिवार को केंद्र की आलोचना की। उनके मुताबिक, इस आयोग की परिकल्पना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने की थी। बनर्जी ने अपने भाषण में कहा, ‘‘क्यों योजना आयोग को भंग किया गया जिसकी परिकल्पना नेताजी ने आजाद भारत के लिए की थी? क्यों नेताजी की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की हमारी सरकार की मांग अब भी लंबित है? ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल चुनाव से पहले नेताजी को याद नहीं करते। वह हमारे दिलों में 365 दिन रहते हैं। हम उनके परिवार के संपर्क में हैं।’’
नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग
बनर्जी ने केंद्र से नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की। इस सात किलोमीटर लंबे जुलूस का समापन रेड रोड पर स्थित नेताजी की प्रतिमा पर होगा। ममता बनर्जी ने कहा कि संसद के चारों सत्र को देश के अलग-अलग जगहों पर आयोजित किया जाना चाहिए। नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के अनेक नेता, विधायक समेत सैकड़ों लोग जुलूस में शामिल हुए। रैली में मुख्य सचिव अल्पन बंदोपाध्याय तथा राज्य सरकार के अन्य नौकरशाह भी मौजूद थे।

राहुल ने तमिलनाडु में चुनाव अभियान का किया आगाज, कहा- जनता से जुड़ी हर चीज को बेच रहे हैं PM मोदी

facebook twitter instagram