आओ सब मिलकर प्रण करें...

पिछले दिनों या यूं कह लो सदियों से बेटियों के साथ अत्याचार, रेप, दहेज केस होते आए हैं जिसमें स्वामी दयानन्द बहुत बदलाव लाए। कई कुप्रथाओं को समाप्त किया परन्तु इतना समय बीत जाने के बाद हालत ज्यों की त्यों बनी हुई है। आज हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं परन्तु यह कुछ महिलाओं तक ही सीमित है। बहुत-सी घटनाओं ने सारे देश को हिला कर रख दिया जैसे निर्भया कांड, डा. रेड्डी कांड, उन्नाव कांड और कुछ ऐसे या इससे भी भयंकर कांड होंगे जो दुनिया के सामने ही नहीं आते होंगे, ऐसी बहुत सी बेटियां हैं जिनकी अन्तिम चीखें, सिसकियां हमारे सबके सामने तक पहुंच ही नहीं पाती होंगी या दबा दी जाती हैं या खुद डर, सहम कर दब जाती हैं। 

एक तरफ हम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे से बेटियों और उनके जन्मदाताओं का हौंसला बुलन्द करते हैं दूसरी तरफ रेप करने और जलाकर मार डालने वाले सब धराशायी कर देते हैं। मां-बाप कितनी मेहनत से बेटियों को पालते-पढ़ाते हैं और ऐसे ​दरिन्दे कैसे उनको एक मिनट में जला देते हैं, मार देते हैं। बाद में पकड़े जाते हैं, सालों केस चलते हैं, कुछ बच जाते हैं, कुछ को सालों बाद सजा मिलती है। बहुत दिल दुखता है, रोता है, तड़पता है और जब हमारी किसी बेटी के साथ ऐसा होता है तो हम सड़कों पर उतर आते हैं, कैंडल मार्च करते हैं, धरने देते हैं, भूख-हड़ताल करते हैं। कभी पुलिस, कभी सरकार को कोसते हैं और कई छोटी सोच वाले नेता इसको राजनीतिक बना देते हैं और इसका प्रयोग भी करते हैं। शर्म आती है ऐसे लोगों की सोच पर। Thank God. Media इस पर अपना रोल सही निभाता है जो Positive, Negative दोनों Picture दुनिया के सामने रखता है। 

अभी जो हैदराबाद पुलिस ने कर दिखाया, एक दम मुंह से निकलता है बहुत अच्छा किया। ऐसा ही होना चाहिए था, ऐसे लोगों को चौराहे पर खड़े करके फांसी देनी चाहिए परन्तु जब हम बाद में सोचते हैं तो लगता है फिर कानून क्या है, संविधान कहां है। क्यों ऐसी नौबत आई। दूसरी तरफ पक्ष यह भी आता है कि ऐसे लोगों के साथ यही होना चाहिए। इन्हें कुत्ते की मौत ही मरना चाहिए। पुलिस को भी सलाम करने को मन करता है, परन्तु फिर वही सवाल कहां-कहां इतनी पुलिस तैनात हो सकती है। उनको बाद में क्या-क्या सामना करना पड़ेगा यह भी एक जगह समाधान हो सकता है। हर जगह नहीं। क्या हर स्थान पर पुलिस रक्षा कर सकती है? मार सकती है? सरकार कानून बनाती है। 

पुलिस अपराधी को पकड़ती है। या अपराध रोकती है। अगर उसे पता हो कि यहां अपराध होने वाला है तो रोकने की भी कोशिश कर सकती है परन्तु ऐसा हो नहीं सकता। क्योंकि रेप एक गंदी सोच, गन्दी मानसिकता है जो एक महिला, बच्ची को, बेटी को भोग की वस्तु ही समझते हैं और कहीं भी हो सकता है क्योंकि दुनिया में अच्छे और बुरे लोगों की कमी नहीं। हमने इस दर्द को समझते हुए यही सोचा है कि क्यों न हर घर से एक स्वयं सुरक्षा बेटी की रक्षा की सेना तैयार की जाए। हर घर से चाहे बुजुर्ग हों, युवा हों, युवती हो, प्रण लें कि हम अपने आस-पास मोहल्ला या सोसाइटी में रहने वाली बेटियों की सुरक्षा करेंगे। उनके सच्चे पहरेदार बनेंगे। 

किसी भी गलत नज़र, गलत इरादे को भांप कर बेटियों को बचाएंगे। यह लड़कियां हैं लकड़ियां नहीं। पराली जलने पर इतना शोर मचा कि हम प्रदूषण के प्रति सतर्क रहे। ऐसे ही हर गांव, गली, माेहल्ले, शहर में समाज के युवा, युवती, बुजुर्ग, महिलाएं प्रण लें। इस अभियान का हिस्सा बनें। अपनी फोटो और मैसेज नीचे दिए हुए लिंक पर अपलोड करें जो Bar Code बना है उसे Click करें तब एक फार्म आपके सामने आएगा। उसको भरें और Submit करें और जिनको यह समझ नहीं आता वो अपनी फोटो के साथ प्रण लेते हुए लिखें ‘बेटी की रक्षा, देश की सुरक्षा।’ मैं प्रण लेता/लेती हूं कि अपने आसपास की बेटी की सुरक्षा मेरा जिम्मा है और पंजाब केसरी कार्यालय में भेजें या इस नम्बर 9818373109 के Whatsapp पर अपना प्रण लेते हुए 1 Minute का Video भेजें। 

अगर मुश्किल हो ताे फिर Helpline 9810107375, 9811030309 पर पूछताछ कर सकते हैं। इस तरह हर घर से सिपाही तैयार होंगे और देश भर में बड़ी सेना तैयार होगी। मुझे पूरी उम्मीद है सारे देशवासी जागेंगे, जिम्मेवार बनेंगे तब किसी बेटी की तरफ गंदी आंख नहीं उठेगी जैसे पहले जमाने में अपने गली मोहल्ले, शहर की बेटी अपनी बेटी ही होती थी। वैसा ही माहौल बनेगा और सब कहेंगे बेटी है तो देश है। बेटी की सुरक्षा देश की सुरक्षा।
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