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भाजपा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के हर अधिकार को छीनने पर आमादा - कांग्रेस

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी केंद्र शासित प्रदेश के लिए केंद्र द्वारा अधिसूचित नए भूमि कानूनों को खारिज करती है।
भाजपा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के हर अधिकार को छीनने पर आमादा - कांग्रेस
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी केंद्र शासित प्रदेश के लिए केंद्र द्वारा अधिसूचित नए भूमि कानूनों को खारिज करती है। 
बांदीपोरा के जिले के गुरेज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मीर ने कहा, "नए भूमि कानून जम्मू-कश्मीर के लोगों को भाजपा की ओर से एक और तोहफा है। कांग्रेस पार्टी नए भूमि कानूनों को खारिज करती है और (प्रदेश के लोगों के) अधिकारों के संरक्षण के लिए लड़ने का संकल्प लेती है।"
अधिसूचना पर प्रतिक्रिया देते हुए, मीर ने कहा कि विश्वासघात और धोखे की राजनीति भाजपा की पहचान है। पार्टी अलग-अलग कानूनों में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के हर अधिकार को छीनने पर आमादा है। 
पार्टी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार को लोगों की आकांक्षाओं की चिंता नहीं है और वह ऐसे फैसले कर रही है जो एकतरफा, राजनीति से प्रेरित और लोगों की इच्छाओं के खिलाफ हैं। मीर ने नए भूमि कानूनों को लोगों के अधिकारों पर हमला करार देते हुए कहा कि पार्टी केंद्र सरकार के 'जम्मू-कश्मीर विरोधी' फैसलों को स्वीकार नहीं करेगी। 
प्रदेश प्रमुख ने कहा, ' नए भूमि कानूनों से जम्मू-कश्मीर में बैचेनी पैदा होगी।' राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद उसे केंद्र शासित प्रदेशों में बांट कर कमतर किया गया है। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोग ही नहीं, बल्कि पूरा देश यह समझ चुका है कि भाजपा अपने एजेंडे को अलोकतांत्रिक तरीके से और बिना शर्त लागू करने पर आमादा है। साथ ही साथ विमर्श को बदलने के मकसद से समय समय पर अलग अलग कानूनों को शामिल कर रही है। '
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्त करने के एक साल बाद कई कानूनों में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोगों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
गृह मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना में भूमि कानूनों में विभिन्न बदलावों की जानकारी दी है, जिनमें सार्वजनिक उद्देश्य से प्रतिष्ठान बनाने के लिये कृषि भूमि के इस्तेमाल की मंजूरी देना शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम में किया गया है, जिसकी धारा 17 से 'राज्य के स्थायी निवासी' वाक्यांश को हटा दिया है। 
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