जालौन में खाद्य विभाग की लापरवाही का खमियाजा भुगत रहे हैं उपभोक्ता

उत्तर प्रदेश के जालौन में खाने पीने के सामान से खुले तौर पर मिलावट होने और मानक विहीन खाद्य वस्तुओं के बाजारों मे आमतौर पर बिकने से उपभोक्ता हलकान हैं। खाने पीने के ऐसे सामान के बिकने से भीषण गर्मी के बीच लोगों का स्वास्थ्य लगातार खतरे में बना हुआ है लेकिन खाद्य विभाग इस मामले में कानों में ठंडा तेल डालकर सो रहा है। 

जिले में मिलावटी खाद्य सामाग्री के खुलेआम बिकने से उपभोक्ता परेशान है मानक विहीन खाद्य वस्तुओं के उपभोग से संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है इतना ही नहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण उपभोक्ता पस्त विक्रेता मस्त वाली स्थिति बनी हुई है।

जिले की खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह से जब इस मामले में पूछने की कोशिश की जाती है तो वह अकसर फोन ही नहीं उठाती और कार्यालय में ऐसे मामलों पर बातचीत के लिए मिलती ही नहीं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ऐसी लचर कार्यप्रणाली पर जब जिलाधिकारी मन्नार अख्तर से पूछा गया तो उन्होंने अधिकारी के फोन न उठाने को गंभीर लापरवाही बताया और मामले पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

जालौन जिले के ही एक उपभोक्ता ने बताया कि यहां मिठाई की दुकानों पर खासतौर पर गली कूचे एवं छोटी-छोटी जगहों पर जैसे कालपी कोच जालौन माधवगढ़ रामपुरा जगम्मनपुर या जनपद मुख्यालय उरई की तमाम छोटी-छोटी मिठाई की दुकानों पर सिंथेटिक दूध एवं सिंथेटिक खोवा से मिठाईयां बनाई जा रही है।

बेसन की मिठाइयों को चने की दाल की जगहर खेसरी से बनाया जा रहा है जिसे स्थानीय भाषा में चटरी के नाम से भी जाना जाता है। खाने पीने की चीजों में ऐसी मिलावट पर खाद्य विभाग कुंभकरणी नींद में सोया है। जनपद में मिलावटी सामान की जबरदस्त बिक्री के संबंध में जब जिलाधिकारी मन्नार अख्तर से बात की गयी तो उन्होंने जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के फोन न उठाने को गंभीर लापरवाही बताया और मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द कार्रवाई की बात कही।

प्रशासन की लापरवाही के चलते हलवाई और दुकानदार मानक विहीन व्यंजन बेचने में जरा भी हिचक नहीं करते।उपभोक्ता के स्वास्थ्य से उन्हें कोई सरोकार नहीं है उन्हें तो बस अपनी जेब भरने की चिंता अधिक होती है।

 प्रशासनिक उदासीनता के चलते दुकानदारों के हौंसले इतने बुंलंद हैं कि वह अधिकारियों के अपने जेब में होने का दावा करते हैं। इसका नतीजा है कि देश भर में पांच सौ से छह सौ रूपये प्रति किलों के हिसाब से बेचा जाने वाले देसी घी जालौन में आसानी से 200 रूपये में एक किलो मिल जाता है। 

इसी तरह जनपद जालौन में मानक बीन एवं मिश्रित गुटका भी धड़ल्ले से बिक रहा है पानी के नाम पर गड्ढों का पानी हाथ की थैली बना कर सरेआम पानी बेचा जा रहा है जिसके कारण उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है साथ ही संक्रामक बीमारियां भी फैल रही हैं।
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