सेंट स्टीफंस कॉलेज के फैसले पर विवाद

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के सेंट स्टीफंस कॉलेज में सुप्रीम काउंसिल सदस्यों को एडमिशन इंटरव्यू पैनल में शामिल करने के निर्णय की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कड़ी निंदा की है। कॉलेज प्रशासन से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए एबीवीपी ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से असंबद्ध व्यक्ति या संस्था का शैक्षणिक संस्थान में आकस्मिक हस्तक्षेप को किसी भी पैमाने पर सही नहीं ठहराया जा सकता है।

एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि इस निर्णय से अनावश्यक रूप से चर्च का हस्तक्षेप शिक्षण व्यवस्था में बढ़ेगा जो शैक्षणिक संस्थान में धर्मनिरपेक्ष वातावरण पर सीधा आघात है। यह निर्णय सेंट स्टीफंस कॉलेज के संविधान में वर्णित नियमों की भी अवहेलना करता है। कॉलेज इस निर्णय को वापस लेते हुए प्रवेश प्रक्रिया पर पहले जैसी स्थिति सुनिश्चित करें और प्राध्यापक को इस निर्णय का विरोध करने पर दिए गए नोटिस को वापस ले। एबीवीपी ने उग्र आंदोलन करने की बात कही है।

प्राचार्य ने दी तीन शिक्षकों को चेतावनी, लिखा पत्र
सेंट स्टीफंस के प्राचार्य प्रो. जॉन वर्गीस ने प्रो. नंदीता समेत दो अन्य शिक्षकों को चेतावनी देते हुए पत्र लिखा है। प्राचार्य ने प्रो. नंदीता के चर्च के प्रतिनिधियों को साक्षात्कार के पैनल में शामिल करने की बात को प्राचार्य की घोषणा बताए जाने के दावे को भी गलत करार दिया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जिस निर्णय को प्रो. नंदीता प्राचार्य द्वारा घोषणा की बात कह रही हैं। वह दरअसल कॉलेज की सुप्रीम काउंसिल ​का फैसला है। कॉलेज क्रिंश्चन अल्पसंख्यक संस्थान है और सुप्रीम काउंसिल के पास कॉलेज की एडमिशन पॉलिसी पर फैसला लेने की पूरी पावर है।

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