न्यायालय का UP बार काउंसिल के नेता की हत्या मामले में CBI जांच कराने की याचिका पर विचार से इंकार

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश सिंह यादव की आगरा में दीवानी अदालत परिसर में गोली मार कर हत्या के मामले की सीबीआई जांच के लिये दायर याचिका पर विचार से इंकार कर दिया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा कि इसके लिये उसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाना चाहिए। 

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी आर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि जहां तक बार की नेता की हत्या के मामले का सवाल है तो इसके लिये याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाना होगा। 

पीठ ने याचिका में की गयी प्रार्थनाओं का जिक्र करते हुये कहा कि अधिकांश उस घटना से संबंधित हैं जिसमे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। 

याचिकाकर्ता के वकील ने जब दिल्ली की एक अदालत परिसर की घटना का हवाला दिया तो पीठ ने कहा, ‘‘कृपया आप पूरी तैयारी कीजिये। इसके लिये अलग से याचिका दायर करें। आपकी प्रार्थनायें मूलरूप से एक घटना के संबंध में हैं। आप अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय जायें।’’ 

याचिकाकर्ता ने जब यह कहा कि याचिका में महिला अधिवक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है तो पीठ ने कहा, ‘‘क्या उच्च न्यायालय इस पर विचार और राहत देने में शक्तिहीन है।’’ पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय जाने की छूट प्रदान की है। 

उप्र बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव को एक अन्य वकील मनीष शर्मा ने 14 जून को न्यू आगरा में दीवानी अदालत परिसर में तीन गोलियां मारी थीं और इसके बाद खुद को भी गोली मार ली थी। दरवेश यादव को गोली मारने वाला वकील मनीष शर्मा उनका पुराना परिचित था। 

शीर्ष अदालत में अधिवक्ता इन्दु कौल ने यह याचिका दायर कर बार काउंसिल आफ इंडिया को महिला अधिवक्ताओं के लिये सामाजिक सुरक्षा उपाय तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। 
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