निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के उपचार संबंधी याचिका पर SC ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

01:16 PM Jun 05, 2020 | Anjali Wala
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमित मरीजों के देश में निजी अस्पतालों में इलाज पर आने वाले खर्च की ऊपरी सीमा तय करने संबंधी जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहा । सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने अभिषेक गोयनका की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक सप्ताह में इस बारे में सरकार से निर्देश लेकर आने को कहा। मामले की सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
यह जनहित याचिका अविशेक गोयनका ने दायर की है जिसमें निजी अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के इलाज के खर्च की ऊपरी सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया गया है। अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका की एक प्रति सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को दी जानी चाहिए जो इस मुद्दे पर निर्देश लेंगे और एक सप्ताह में जवाब देंगे। याचिका में संक्रमित लोगों के लिए निजी पृथक-वास केंद्र की सुविधा एवं अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की गयी है, ताकि वे इस तरह की सुविधाओं का लाभ भुगतान के आधार पर उठा सकें।

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वर्तमान में इस तरह का विकल्प मरीजों के पास नहीं है । इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार को समान मानक वाले ऐसे केंद्रों में उपचार की सांकेतिक दरों को भी निर्धारित करने के लिये कहा जाए। इसमें यह भी कहा गया है कि बीमा कंपनियों द्वारा मेडिक्लेम का समयबद्ध निपटान होना चाहिए और सभी बीमित रोगियों को कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जाए।