लखनऊ में गंदगी एवं कूड़े को लेकर न्यायालय का कड़ा रुख

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शहर की साफ-सफाई एवं कूड़े मुक्त किये जाने के मामले में नगर निगम सहित लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), आवास विकास परिषद और अन्य संबंधित विभागों के आला अफसरों के द्वारा पेश रिपोर्ट पर अंसतोष जताते हुए फिर से कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा कि सभी विभागों के अफसर फिर से स्पष्ट करे कि कितने ठेकेदार, एनजीओ और कर्मचारियों को सफाई का काम दिया गया।

अदालत ने कहा कि आम जनता की गाढ़ कमाई का दुरुपयोग मिलने पर बहुत सख्त कदम उठाया जाएगा। इसी के बावत न्यायालय ने सभी विभागों से फिर से विस्तृत हलफनामें मांगे है। न्यायमूर्ति मुनीस्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति सौरभ लावानिया की पीठ ने नगर निगम की ओर से दायर याचिका पर स्वयमेव संज्ञान लेकर दर्ज याचिका पर सोमवार को यह आदेश दिए।

अदालत ने एक अन्य याचिका को भी साथ मे सूचीबद्ध किया है याची की ओर से आरोप लगाए गए कि लखनऊ शहर में जगह-जगह कूड़ इक्टठा करने से आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। शहर में धड्डल्ले से पॉलीथीन का प्रयोग हो रहा है। पॉलीथीन के रोकने का शासनादेश ठंडे बस्ते में चला गया है। पॉलीथीन कूड़ कचरा बढ़ रही है। नालो एवं नालियों में सफाई नहीं की जा रही है। नालो से निकला कचरा सड़को पर ढेर लगा है। छुट्टा जानवर सड़को पर है। पूरे शहर में अतिक्रमण से जाम की स्थिति है।

अदालत में सुनवाई के समय नगर आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों की के रिपोर्ट पर संतुष्टि जाहिर नही की। अदालत ने कहा कि लखनऊ में कोई सफाई नहीं है जगह-जगह कूड़ सडको पर बिखरा पड़ है तथा ढ़र लगे है। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि महज कुछ लोगों और ठेकेदारो को लाभ देने के लिए केवल कागजों पर कार्रवाई दिखाई जा रही है।

अदालत ने नगर आयुक्त से पूछा कि सलाना कितना बजट आता है इस पर बताया कि बारह सौ करोड़ का बजट आता है। न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा कि इस बजट का उपयोग आम जनता के लये होना चाहिये। कहा कि महज ठेकेदारो को लाभ देने के लिए इसका उपयोग न किया जाए। यह भी कहा कि हर विभाग में ठेकेदारो और चहेतो को लाभ देने संबंधी भ्रष्टाचार बन्द होना चाहिए।

अदालत ने नगर निगम सहित अन्य विभागों के साथ-साथ लखनऊ के जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश दिए है कि शहर की गंदगी अतिक्रमण, छुट्टा जानवरो एवं साड़ के बावत अपनी भूमिका निभाएंगे। अदालत ने कहा कि सड़कों को खोदाई एवं नालो की सफाई के बाद कचरे को तत्काल हटाया जाय। पॉलिथीन पर रोक के बावजूद भी प्रयोग हो रहा है इसपर अदालत ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने जिला प्रशासन से भी कहा कि तत्काल अवैध पॉलीथीन की बिक्री पर रोक लगाए और इसके लिए शासनादेश का कड़ई से पालन कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

Download our app