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CPI(M) का कटाक्ष- यदि सांप्रदायिक ताकतों पर पाबंदी लगानी है, तो सबसे पहले आरएसएस को प्रतिबंधित करना चाहिए

केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मंगलवार को कहा कि सांप्रदायिक ताकतों या चरमपंथी संगठनों पर पाबंदी लगाने से इनकी गतिविधियां समाप्त नहीं होंगी और अगर इस तरह का कदम उठाना ही है, तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को प्रतिबंधित करना चाहिए।
CPI(M) का कटाक्ष- यदि सांप्रदायिक ताकतों पर पाबंदी लगानी है, तो सबसे पहले आरएसएस को प्रतिबंधित करना चाहिए
केरल (Kerala) में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने मंगलवार को कहा कि सांप्रदायिक ताकतों या चरमपंथी संगठनों पर पाबंदी लगाने से इनकी गतिविधियां समाप्त नहीं होंगी और अगर इस तरह का कदम उठाना ही है, तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को प्रतिबंधित करना चाहिए।माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन का बयान इस खबर के बीच आया है जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की तैयारी में है।
संगठन को प्रतिबंधित करना समस्या का हल नहीं 
गोविंदन का यह बयान एक दिन पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के उस बयान के बाद आया जिसमें आरोप लगाया गया है कि केरल अब आतंकवाद, अराजक तत्वों का ‘हॉटस्पाट’ बन चुका है, जहां जीवन सुरक्षित नहीं है।गोविंदन ने कहा, ‘‘यदि किसी संगठन को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए तो वह है आरएसएस। यह सांप्रदायिक गतिविधियों को अंजाम देने वाला मुख्य संगठन है। क्या इसे प्रतिबंधित किया जायेगा? एक चरमपंथी संगठन को प्रतिबंधित करने से समस्या हल नहीं होगी। पूर्व में आरएसएस पर प्रतिबंध लग चुका है। भाकपा पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।’’
नए नाम से फिर अस्तित्व में आ जाएगा 
उन्होंने कहा कि किसी संगठन को प्रतिबंधित करने से इसकी विचारधारा का अंत नहीं होगा और यह एक नए नाम से फिर अस्तित्व में आ जाएगा।उन्होंने आजादी के बाद आरएसएस पर लगी पाबंदी और भाकपा पर वर्ष 1950 में लगाये गये प्रतिबंध का जिक्र किया।क्या वाम मोर्चा स्थानीय निकाय में जीत हासिल करने के लिए ऐसे संगठनों से हाथ मिलायेगा? इस सवाल पर गोविंदन ने नहीं में जवाब दिया।
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