क्रिकेट जगत ने खोया एक सितारा, दुनिया के सबसे महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स का 89 साल की उम्र में निधन
Sir Garfield Sobers passes away: क्रिकेट जगत ने खोया एक सितारा! एक महान खिलाड़ी इस दुनिया से चला गया. दोस्तों, क्रिकेट की दुनिया से आज एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की आंखें नम कर दी हैं। एक ऐसा नाम, जिसने क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं बल्कि कला बना दिया था..जिसने बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग तीनों डिपार्टमेंट में दबदबा बनाया. अब हमारे बीच नहीं रहा। दुनिया के सबसे महान ऑलराउंडर, क्रिकेट इतिहास के सबसे कंप्लीट प्लेयर, सर गारफील्ड सोबर्स ने 89 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके जाने से सिर्फ वेस्टइंडीज़ ही नहीं, बल्कि पूरा क्रिकेट जगत शोक में डूब गया है।
Sir Garfield Sobers passes away

सोचिए... एक ऐसा खिलाड़ी जिसने बल्लेबाजी में रिकॉर्ड बनाए, गेंदबाजी में बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया, फील्डिंग में असंभव कैच को आसान बना दिया और कप्तानी में अपनी अलग पहचान बनाई... आज वही महान खिलाड़ी हमेशा के लिए क्रिकेट के मैदान से विदा हो गया। क्रिकेट के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा खिलाड़ी हुआ हो जिसे हर विभाग में "Greatest Ever" कहा जा सके। लेकिन सर गैरी सोबर्स उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे, जिनके लिए यह शब्द भी छोटा पड़ जाता है।
शानदार रहा है उनका क्रिकेट करियर

28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में उनका जन्म होता है। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने वेस्टइंडीज़ के लिए टेस्ट डेब्यू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वो क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर माने जाते हैं।
उनके टेस्ट करियर की बात करें तो सर गारफील्ड सोबर्स ने 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन बनाए। उनका बल्लेबाजी औसत 57.78 रहा, जो उस दौर में किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने 26 शतक और 30 अर्धशतक लगाए, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 365 रन नाबाद रहा। साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी 365* रनों की ऐतिहासिक पारी उस समय टेस्ट क्रिकेट का विश्व रिकॉर्ड थी। यह रिकॉर्ड लगभग 36 वर्षों तक कायम रहा और बाद में ब्रायन लारा ने इसे तोड़ा।
लेकिन सिर्फ बल्ले से ही नहीं... गेंद से भी सर सोबर्स उतने ही घातक थे। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 235 विकेट लिए। सबसे खास बात यह थी कि वह तेज़ गेंदबाजी भी कर सकते थे, मीडियम पेस भी डालते थे और जरूरत पड़ने पर बाएं हाथ की स्पिन और चाइनामैन गेंदबाजी से भी बल्लेबाजों को चकमा देते थे। क्रिकेट इतिहास में शायद ही कोई दूसरा खिलाड़ी रहा हो जो गेंदबाजी की इतनी अलग-अलग शैलियों में माहिर रहा हो।
फील्डिंग की बात करें तो सर सोबर्स ने टेस्ट क्रिकेट में 109 कैच पकड़े। उनकी चुस्ती, एथलेटिक क्षमता और रिफ्लेक्स अपने दौर से कई दशक आगे थे। मैदान पर उनकी मौजूदगी ही विपक्षी टीम पर दबाव बना देती थी।
क्रिकेट जगत में क्रांति लेकर आए

सर गारफील्ड सोबर्स सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं थे। उन्होंने क्रिकेट को एक नई सोच दी। वह पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट के एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाए। साल 1968 में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए मैल्कम नैश के एक ओवर में छह गेंदों पर छह छक्के जड़कर उन्होंने इतिहास रच दिया। आज टी-20 क्रिकेट में यह कारनामा कई बार देखने को मिला है, लेकिन इसकी शुरुआत सर सोबर्स ने दशकों पहले कर दी थी।
उनकी महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 1968 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया और वह "Sir" Garfield Sobers कहलाए। बाद में उन्हें ICC Hall of Fame में भी शामिल किया गया। वेस्टइंडीज़ सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा और दुनिया भर के क्रिकेटरों ने उन्हें अपना आदर्श माना। सचिन तेंदुलकर, विवियन रिचर्ड्स, ब्रायन लारा, जैक्स कैलिस और कई दिग्गज खिलाड़ियों ने खुले मंच से स्वीकार किया कि सर सोबर्स जैसा ऑलराउंडर शायद क्रिकेट को दोबारा कभी न मिले।
क्योंकि कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं... कुछ खिलाड़ी ट्रॉफियां जीतते हैं... लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो पूरे खेल की पहचान बन जाते हैं। सर गारफील्ड सोबर्स उन्हीं महान खिलाड़ियों में से एक थे। उनका नाम हमेशा क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में सबसे ऊपर लिखा जाएगा।
सर गारफील्ड सोबर्स अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पारियां, उनके विकेट, उनके कैच और उनका निडर अंदाज आने वाली हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। क्रिकेट उन्हें कभी नहीं भूल पाएगा। आपने क्रिकेट को जो विरासत दी है, वह हमेशा अमर रहेगी।
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