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देश में चिकित्सा आपूर्ति करने वाले अमेरिकी विमानों को हुआ विलंब, मरम्मत संबंधी दिक्कतों से हो रही देरी

भारत में आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा सामान लेकर जाने वाले अमेरिकी वायु सेना के विमानों की उड़ान में मरम्मत संबंधी दिक्कतों के कारण बुधवार तक की देरी हो गई है।
देश में चिकित्सा आपूर्ति करने वाले अमेरिकी विमानों को हुआ विलंब, मरम्मत संबंधी दिक्कतों से हो रही देरी
भारत में आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा सामान लेकर जाने वाले अमेरिकी वायु सेना के विमानों की उड़ान में मरम्मत संबंधी दिक्कतों के कारण बुधवार तक की देरी हो गई है। पेंटागन के एक प्रवक्ता ने कहा,‘‘हमें अभी पता चला है कि भारत के लिए उड़ान भरने वाले विमानों में मरम्मत संबंधी दिक्कतों के कारण कम से कम बुधवार तक की देरी हो गई है।’’ अभी तक भारत में अमेरिकी वायु सेना के 2 विमान पहुंचे हैं।
कोरोना वायरस के मामलों में बेतहाशा वृद्धि के बीच आवश्यक चिकित्सा सामान की आपूर्ति करने के लिए अमेरिकी वायु सेना के तीन सी-5 सुपर गैलेक्सीज तथा एक सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों को सोमवार केा भारत जाना था। बहरहाल, अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि इससे भारत में आपात चिकित्सा सामान मुख्यत: ऑक्सीजन सिलेंडर और सांद्रक की आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा। इससे पहले, पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने पत्रकारों से कहा कि भारत को स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति करने के लिए अमेरिका के विमान उड़ान भरते रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत सरकार और उनके नागरिकों की सहायता करते रहेंगे क्योंकि वे कोविड-19 के मामलों में वृद्धि से जूझ रहे हैं।’’ हम भारत में अपने समकक्षों के संपर्क में रहेंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या वहां अतिरिक्त मदद की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने भारत में अपने समकक्ष से बातचीत में स्पष्ट कहा कि हम हरसंभव तरीके से उनकी मदद करते रहेंगे। सीनेटर एमी क्लोबुचर ने कहा कि भारत में यह संकट इस बात की याद दिलाता है कि ‘‘हम कोविड-19 को तभी हरा सकते हैं जब हम हर जगह इसे परास्त कर दें।
इस बीच भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर चिंता जताते हुए अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ और व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने देशभर में लॉकडाउन लगाने, व्यापक पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाने और बड़ी संख्या में अस्थायी अस्पताल बनाने की सलाह दी है। दुनिया में संक्रामक रोग के शीर्ष विशेषज्ञ माने जाने वाले डॉ. फाउची ने सोमवार को कहा, यह साफ है कि भारत में हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब इतनी बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हो, हर किसी की पर्याप्त देखभाल न हो पा रही हो, अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सामान की कमी हो तो यह बेहद निराशाजनक स्थिति बन जाती है। इसे देखते हुए हमें लगता है कि पूरी दुनिया को हरंसभव तरीके से मदद करनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी चीजें है जो भारत फौरन कर सकता है। डॉ. फाउची ने कहा, ‘‘सबसे पहले अभी उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाना शुरू करना चाहिए, चाहे वे उनके द्वारा विकसित टीके हो या वे अन्य आपूर्तिकर्ताओं से खरीदें जैसे कि अमेरिका, रूस और अन्य कोई भी देश।’’ उन्होंने कहा कि हालांकि अभी टीका लगाने से आज पैदा हुई समस्या खत्म नहीं होगी। इससे कई हफ्तों के लिए राहत तो मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अभी यही समाधान है और मुझे पता है कि भारत पहले ही यह कर रहा है। कुछ दिनों पहले मैंने सुझाव दिया था कि देश में लॉकडाउन लागू करना चाहिए। आपको छह महीने के लिए लॉकडाउन लगाने की जरूरत नहीं है। आप कुछ हफ्तों के लिए लॉकडाउन लगा सकते हैं।’’
साथ ही डॉ. फाउची ने तत्काल अस्थायी अस्पताल बनाने के लिए सशस्त्र बलों की सहायता लेने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत आपात स्थितियों में अकसर दूसरे देशों की मदद करता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह देखते हुए कि भारत कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि को लेकर बहुत दबाव में है तो बाकी देशों को उसकी मदद करनी चाहिए जैसा कि अमेरिका कर रहा है।’’ वहीं, अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने बाइडन प्रशासन से इस बारे में जानकारी मांगी कि उसकी भारत और अन्य देशों को कोविड-19 रोधी टीका मुहैया कराने पर क्या योजना है।
अमेरिका विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और स्वास्थ्य एवं मानव सेना मंत्री जेवियर बेकेरा को लिखे पत्र में भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति समेत चार सांसदों ने कई देशों को छह करोड़ टीके वितरित करने के फैसले की प्रशंसा की। भारत और अन्य देशों को एफडीए की समीक्षा के कारण एस्ट्राजेनेका टीकों की पहली खेप की आपूर्ति में संभावित देरी पर चिंता जताते हुए उन्होंने बाइडन प्रशासन से यह बताने के लिए कहा कि इन देशों को टीकों की कितनी खुराक मिलेगी।
पत्र में कहा गया है, ‘‘भारत, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों में संक्रमण के बेतहाशा मामले आ रहे हैं। अकेले भारत में महज तीन दिनों में कोविड-19 के 10 लाख से अधिक नए मामले आए हैं। प्रशासन ने समझदारी से फैसला लिया है। एस्ट्राजेनेका टीके का अभी अमेरिका में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि कंपनी ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को आपात इस्तेमाल प्राधिकार के लिए आवेदन नहीं दिया है।’’
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