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दिल्ली में कोरोना की स्थिति चिंताजनक, अस्पतालों में बेड्स कम पड़े तो लगाना पड़ जाएगा लॉकडाउन : CM केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना के हालातों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अगर अस्पतालों के अंदर बेड्स की कमी हो गई तो दिल्ली में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।
दिल्ली में कोरोना की स्थिति चिंताजनक, अस्पतालों में बेड्स कम पड़े तो लगाना पड़ जाएगा लॉकडाउन : CM केजरीवाल
राजधानी में कोरोना वायरस की स्थिति बिगड़ती जा रही है। बेकाबू होती महामारी और लोगों की लापरवाही ने दिल्ली सरकार की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कोरोना के हालातों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अगर अस्पतालों के अंदर बेड्स की कमी हो गई तो दिल्ली में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर है। पिछले 24 घंटे में 10,732 केस आए है। मार्च के बीच तक प्रतिदिन 200 से भी कम केस आ रहे थे। दिल्ली सरकार स्थिति पर पूरी तरह नज़र रखे हुए है। हम लॉकडाउन नहीं लगाना चाहते हैं लेकिन कल सरकार ने मजबूरी में कुछ पाबंदियों के आदेश दिए हैं। इस वक़्त का पीक नवंबर से भी खतरनाक है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना के 65 प्रतिशत मरीज़ 45 साल से कम उम्र के हैं, फिर कोरोना रूकेगा कैसे? कोरोना का चक्र तब ही टूटेगा जब वैक्सीनेशन होगा। केंद्र सरकार ने बहुत पाबंदियां लगा रखी हैं मेरा केंद्र से निवेदन है कि वो पाबंदियां हटा दें।
वैक्सीन लेने के बाद भी सामने आ रहे संक्रमण के मामलों पर मुख्यमंत्री ने कहा,  देश भर से रिपोर्ट आ रही है की वैक्सीन लगाने पर भी कोरोना हो रहा है! इसपर घबराने वाली बात नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैक्सीन लगाने के बाद भी कोरोना हो गया, तो वो जानलेवा नहीं होगा। वैक्सीन से कोरोना की सीरियसनेस कम हो जाएगी। इसलिए तुरंत वैक्सीन लगवाए और मास्क पहने रहें।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि कोरोना के प्रोटोकॉल फॉलो करने होंगे, मास्क पहनिए और जब ज़रूरी हो तभी घर से बाहर निकलें। हम कोशिश कर रहे हैं  कि अस्पताल में बेस्ट से बेस्ट इलाज मिले। नवंबर के महीने में 8 साढ़े हजार की पीक आई थी, आज मामले 10 हजार के पार हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल जाने की जरूरत है तभी अस्पताल जाएं वरना बेड्स कम पड़ जाएंगे। अगर सीरियस मरीज़ को बेड नही मिला तो उसकी मौत हो सकती है इसलिए घर के अंदर होम आइसोलेशन में इलाज कराइये। जब तक अस्पताल में जाने की जरूरत न हो, अस्पताल न जाएं।
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