दिल्ली HC ने मेट्रो की तर्ज पर बसों में घोषणा की मांग वाली याचिका पर ज्ञापन की तरह विचार करने को कहा

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार को निर्देश दिया है कि सार्वजनिक परिवहन की बसों में मेट्रो ट्रेनों की तर्ज पर दरवाजों के खुलने तथा आगामी बस स्टॉप आने पर स्वघोषणा और डिजिटल डिस्प्ले की मांग वाली जनहित याचिका को ज्ञापन की तरह माना जाए। 

न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए निर्देश जारी किया। अदालत ने कहा कि संगठन को अदालत में आने से पहले सरकार को ज्ञापन देना चाहिए। 

पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह की याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह प्रतिवादी (सरकार) की विशेषज्ञता पर निर्भर करता है कि क्या इस तरह की सुविधाओं को मौजूदा बसों में जोड़ा जा सकता है या नहीं।’’ 

अदालत ने पीआईएल का निस्तारण करते हुए कहा, ‘‘हम इस रिट याचिका पर विचार करने की कोई वजह नहीं देखते। फिर भी, हम प्रतिवादियों को निर्देश देते हैं कि इस याचिका को ज्ञापन की तरह लिया जाए, इस रिट याचिका में याचिकाकर्ता की प्रार्थना पर विचार किया जाए और कानून के अनुसार काम किया जाए।’’ 

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