50 मॉडल शहरों में दिखेगी स्वच्छता की नई मिसाल, हर दो महीने में होगी प्रगति की समीक्षा
Delhi News : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत ‘प्रगति-50’ पहल की शुरुआत की है। इसके तहत देश के 24 राज्यों के 50 शहरों को मॉडल शहर के रूप में चिन्हित किया गया है। इन शहरों में स्वच्छता के उच्च मानक स्थापित करने के लिए लक्ष्य आधारित और तकनीक-सक्षम निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य शहरों में केवल नियमित साफ-सफाई तक सीमित न रहते हुए दृश्य स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था और नागरिक भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार लाना है। इन शहरों की प्रगति की लगातार समीक्षा की जाएगी और परिणाम आधारित आकलन के जरिए उनकी स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
पहल के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि 24 राज्यों के ये 50 शहर देश के अन्य शहरों के लिए स्वच्छता के रोल मॉडल बनेंगे। उन्होंने बताया कि चयन में प्रमुख शहरों के साथ-साथ सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और आर्थिक केंद्रों को भी शामिल किया गया है।
मनोहर लाल ने कहा कि इन शहरों में निर्धारित समयसीमा के भीतर स्वच्छता से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्यवस्थित निगरानी और समीक्षा की जाएगी। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह हर दो महीने में व्यक्तिगत रूप से समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर इन शहरों की प्रगति पर नजर रखेंगे।
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि पिछले एक दशक में स्वच्छता एक जन आंदोलन से आगे बढ़कर जीवनशैली का हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि मॉडल शहरों की यह पहल निर्धारित समयसीमा में शहरों को ‘गार्बेज फ्री सिटी’ के लक्ष्य की ओर ले जाने में मदद करेगी। उन्होंने राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों से माइक्रो-लेवल एक्शन प्लान तैयार कर उसके तेजी से और प्रभावी क्रियान्वयन का आह्वान किया।
डिजिटल निगरानी से होगी शहरों की समीक्षा
पहल के तहत स्वच्छतम पोर्टल पर प्रगति जैसी डिजिटल समीक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। मंत्रालय के अधिकारियों को अलग-अलग शहरों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो नियमित रूप से उनकी निगरानी के साथ-साथ आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी उपलब्ध कराएंगे। शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य बेहतर नागरिक अनुभव और समग्र सेवा वितरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इसमें ‘सिटी एज ए होल’ यानी पूरे शहर को एक इकाई के रूप में देखने का दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों के साथ सभी संबंधित हितधारकों और भागीदारों को योजना और क्रियान्वयन में शामिल किया जाएगा।
13 स्टार्टअप को मिली जगह
शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में तकनीक आधारित समाधान विकसित करने के लिए मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) के सहयोग से स्टार्टअप के तीसरे समूह की शुरुआत की है। इस समूह में 13 स्टार्टअप शामिल किए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले एक दशक में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी ने कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में 75 स्टार्टअप के साथ काम किया है। नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्वच्छता ऐप के साथ अब एक समर्पित व्हाट्सऐप चैनल भी शुरू किया गया है। इसके माध्यम से नागरिक शहर की सफाई से जुड़ी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकेंगे और उनके समाधान की प्रक्रिया में भागीदारी कर सकेंगे। स्वच्छता क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय ने सीएसआईआर-सीएमईआरआई के सहयोग से दुर्गापुर में ‘स्वच्छ भारत टेस्ट बेड एंड इनोवेशन सेंटर’ शुरू किया है।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने ‘स्वच्छता बिहेवियर चेंज डिजिटल कोष’ भी लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वच्छता व्यवहार में बदलाव से संबंधित विचारों, क्रिएटिव, अभियानों और संसाधनों का संग्रह उपलब्ध कराएगा। राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों को यहां तैयार संचार सामग्री और अभियान के विचार मिल सकेंगे।
केंद्रीय मंत्रालय में शुरू हुआ पहला आरआरआर सेंटर
स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत नई दिल्ली स्थित संकल्प भवन में रिड्यूज, रीयूज और रिसाइकिल (आरआरआर) सेंटर का भी उद्घाटन किया गया। इसे किसी केंद्रीय मंत्रालय के कार्यालय में अपनी तरह का पहला केंद्र बताया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यस्थलों में टिकाऊ खपत, वस्तुओं के पुन: उपयोग, संसाधनों की रिकवरी और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। मंत्रालय के अनुसार, प्रगति-50 पहल के जरिए स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचार, आपसी सीख, क्षमता निर्माण और तकनीक आधारित निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका व्यापक लक्ष्य वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ शहरी प्रणालियों के जरिए भविष्य के लिए सक्षम और कचरा-मुक्त शहरों की दिशा में आगे बढ़ना है।

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