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कूड़े के पहाड़ के साथ सीएम रेखा गुप्ता की ‘आखिरी सेल्फी’, 2026 में खत्म करने का प्रण

09:51 PM Oct 03, 2026 IST | Sumant Chaudhary
कूड़े के पहाड़ के साथ सीएम रेखा गुप्ता की ‘आखिरी सेल्फी’  2026 में खत्म करने का प्रण
Chief Minister Rekha Gupta

Delhi News : वर्षों से दिल्ली के माथे पर दाग बने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के साथ अब चुनौती यह है कि रोज निकलने वाला नया कचरा दोबारा किसी नए पहाड़ की शक्ल न ले। इसी दोहरी चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम ने कचरा निस्तारण की नई क्षमता जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को ओखला लैंडफिल साइट से ओखला, सिंघोला और गाजीपुर में नए कचरा निस्तारण संयंत्रों तथा गाजीपुर में बायोगैस संयंत्र का वर्चुअल शिलान्यास किया। चारों परियोजनाओं से कुल 3200 टन प्रतिदिन की नई प्रसंस्करण क्षमता जुड़ने का रास्ता साफ हुआ है।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण कर अधिकारियों से पुराने कचरे के निस्तारण, खाली कराई गई जमीन और रोज पहुंचने वाले नए कचरे की स्थिति समझी। इस दौरान कूड़े के पहाड़ के साथ तस्वीर खिंचवाते हुए उन्होंने इसे अपनी ‘आखिरी सेल्फी’ बताया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लक्ष्य है कि दिल्ली में न पुराने कूड़े के पहाड़ रहें और न भविष्य में कोई नया पहाड़ खड़ा हो। इसी ध्येय के साथ 2026 में इसे खत्म करने का प्रण लिया जा रहा है।

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इसी कार्यक्रम से मुख्यमंत्री ने कोटला मुबारकपुर में नवनिर्मित मातृत्व एवं शिशु केंद्र भी वर्चुअल माध्यम से जनता को समर्पित किया। कार्यक्रम में महापौर प्रवेश वाही, उप महापौर डॉ. मोनिका पंत, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, नेता सदन जय भगवान यादव, डेम्स समिति अध्यक्ष संदीप कपूर, निगम आयुक्त संजीव खिरवार सहित पार्षद और निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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ओखला में सबसे बड़ा 1400 टन क्षमता का प्लांट

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा संयंत्र ओखला में स्थापित होगा, जिसकी क्षमता 1400 टन प्रतिदिन होगी। सिंघोला में 700 टन और गाजीपुर में 800 टन प्रतिदिन क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे। इसके साथ गाजीपुर में बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट भी बनेगा। इस तरह चारों परियोजनाएं मिलकर रोजाना 3200 टन कचरे को संभालने की अतिरिक्त क्षमता तैयार करेंगी। गाजीपुर में बायोगैस संयंत्र को यमुना की स्वच्छता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यहां जैविक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण कर उससे संसाधन तैयार करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से नई प्रोसेसिंग यूनिटों को जल्द से जल्द पूरी क्षमता से कार्यशील करने को कहा है।

डेढ़ साल में 217.17 लाख मीट्रिक टन कचरा साफ

निगम के मुताबिक ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों पर पिछले करीब डेढ़ वर्ष में 217.17 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण किया गया है। इससे करीब 100 एकड़ जमीन कचरे से मुक्त हुई है। अब इसी खाली होती जमीन के बेहतर इस्तेमाल की भी तैयारी शुरू हो गई है। महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि ओखला में कार्यक्रम स्थल के पास दिखाई दे रही जमीन पर करीब दो महीने पहले तक कचरे का ढेर था। पिछली बार मुख्यमंत्री ने यहां पहुंचकर निस्तारण की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए थे। अब खाली हुई करीब तीन एकड़ जमीन पर पार्क विकसित करने की योजना है।

पुराना पहाड़ घटे और पीछे से नया न खड़ा हो

पूरे अभियान में अब सबसे बड़ा फोकस रोज दिल्ली से निकलने वाले नए कचरे पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल लैंडफिल के ऊपर दिखाई देने वाले कचरे को हटाने से समस्या खत्म नहीं होगी। वर्षों से नीचे दबे लीगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण भी जरूरी है। इसके साथ रोज लैंडफिल तक पहुंचने वाले फ्रेश वेस्ट को प्रोसेस करने की पर्याप्त व्यवस्था बनानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुराने कूड़े को खत्म करना नहीं है। अगर एक तरफ पुराना कचरा हटता रहे और दूसरी तरफ नया कचरा जमा होता रहे तो समस्या बनी रहेगी। इसलिए प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाकर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें नया कचरा सीधे पहाड़ का हिस्सा बनने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस हो।

कचरे से संसाधन और ऊर्जा बनाने पर जोर

नई रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के साथ वेस्ट-टू-रिसोर्स और नवीकरणीय ऊर्जा को भी शामिल किया गया है। गाजीपुर में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट इसी मॉडल का हिस्सा होगा। सरकार और निगम का प्रयास है कि कचरे को केवल लैंडफिल तक पहुंचाने की पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़कर उसके अधिकतम हिस्से को संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली में रोज पैदा होने वाले कचरे से अधिक निस्तारण क्षमता तैयार करके ही समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पुरानी समस्याओं के लिए आरोप-प्रत्यारोप के बजाय उनके समाधान पर काम कर रही है।

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Sumant Chaudhary

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