DTU ने शुरू किए पांच कोर्स, शोध की नई पहल, अंतरराष्ट्रीय डिग्री कार्यक्रम भी शुरू
Delhi : दिल्ली टेक्नोलाॅजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) ने अपने 85 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षा, शोध, नवाचार और उद्योग सहयोग से जुड़ी कई नई पहलों की घोषणा की। कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
डीटीयू ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से डेटा साइंस और एप्लाइड स्टैटिस्टिक्स में इंटीग्रेटेड बीएससी-एमएससी पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। साथ ही अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के साथ 4+1 एक्सेलरेटेड बीटेक-एमएस कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा, जिससे छात्र डीटीयू से बीटेक के बाद एकीकृत प्रक्रिया के तहत एमएस की पढ़ाई कर सकेंगे।
बीटेक छात्रों के लिए डबल मेजर इन इकोनॉमिक्स ट्रैक भी शुरू किया गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार माइक्रो-क्रेडेंशियल पाठ्यक्रमों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। इसके अलावा कक्षा 9 से आगे के विद्यार्थियों के लिए एप्लाइड एआई, डेटा एनालिटिक्स और एंटरप्रेन्योरशिप में सर्टिफिकेट कोर्स तथा कार्यरत पेशेवरों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ईएसजी एवं कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी और रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के ऑनलाइन प्रमाणपत्र कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए DTU में बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग सेंटर, सिद्धार्थ रिसर्च एंड ट्राइबोलॉजी सेंटर तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी की स्नातक प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जिसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से एक करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। विश्वविद्यालय के दो स्टार्टअप ऑलसिक्योरएक्स और ह्यूरोनिक्स को दिल्ली स्टार्टअप युवा फेस्टिवल में शीर्ष छह स्टार्टअप में स्थान मिला, जबकि नेमा-एआई को फोर्ब्स इंडिया के शीर्ष 100 स्टार्टअप में शामिल किया गया है।
उद्योग और संस्थानों से बढ़ा सहयोग
DTU ने शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल), इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलरेटर सेंटर (आईयूएसी), बजाज ऑटो लिमिटेड, जीआरआईएचए काउंसिल,
इसके अलावा, एसरी इंडिया, भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान (आईआरआईएसईटी), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) सहित कई संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम विज्ञान, भू-स्थानिक तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, सतत विकास और कौशल विकास के क्षेत्रों में संयुक्त शोध, नवाचार तथा तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे।
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