दिल्ली स्लीपर बस रेप मामले में पीड़िता के कपड़ों से मिला आरोपियों का सीमेन व बालों का सैंपल, फौरेंसिंक जांच में हुआ खुलासा
Delhi sleeper bus rape case : ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही एक चलती स्लीपर बस में नाबालिग के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है।
फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के अनुसार बस और पीड़िता के कपड़ों से मिले सीमेन व बालों के नमूनों का डीएनए प्रोफाइल दोनों आरोपियों के डीएनए से पूरी तरह मैच कर गया है।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि बस चालक और कंडक्टर ही इस वारदात के मुख्य आरोपी हैं। अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है और मामले में आरोप तय करने के लिए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
4 अगस्त को घटी घटना
यह खौफनाक वारदात 4 अगस्त की रात को हुई थी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय नाबालिग ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर अपने रिश्तेदार के घर नोएडा सेक्टर 63 जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी। तभी एक स्लीपर बस उसके पास रुकी और चालक-कंडक्टर ने उसे सही रूट की बात कहकर गाड़ी में बैठा लिया।
बस के अंदर कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था। जब लड़की ने नीचे उतरने का प्रयास किया तो आरोपियों ने जबरन दरवाजा बंद कर दिया और चलती बस में ही उसके साथ दरिंदगी की। लगभग 47 किलोमीटर तक बस सड़क पर दौड़ती रही और कश्मीरी गेट के पास आरोपी पीड़िता को बेसुध छोड़कर फरार हो गए।
पाई गईं भारी गड़बड़ियां
पुलिस जांच में बस की सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर लापरवाही सामने आई हैं। बस का सीसीटीवी कैमरा खराब पड़ा था, खिड़कियों पर भारी पर्दे टंगे थे और बिना पुलिस वेरिफिकेशन के ही आरोपियों को नौकरी पर रखा गया था। इतना ही नहीं, बस के 11 चालान भी पेंडिंग पाए गए थे।
इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस पेट्रोलिंग पर गहरी चिंता जताई थी। चार्जशीट में 51 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। अब 7 अक्टूबर को तीसा हजारी कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चार्जेज तय करने पर बहस होगी।
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