विवाहित युवतियों की अप्राकृतिक मौत की त्वरित पुलिस जांच जरूरी है : दिल्ली हाईकोर्ट
Delhi High Court : दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किये जाने में आठ माह की देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विवाहित युवतियों की अप्राकृतिक मौत के मामलों में त्वरित और गहन पुलिस जांच की आवश्यकता होती है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने शादी के महज छह माह के अंदर 25-वर्षीय एक युवती की दहेज मौत के एक मामले में उसके पति और ससुराल वालों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने में युवती की शादी की पूरी अवधि से भी अधिक समय लगा और यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हकीकत है कि मृत महिला के पिता को न्यायिक आदेश के तहत प्राथमिकी दर्ज होने से पहले दर-दर भटकना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज किये जाने में देरी के परिणामों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
Delhi High Court : अस्पताल पहुंचने पर पिता को गड़बड़ी का संदेह
कोर्ट ने उम्मीद जताई कि भविष्य में शादी के तुरंत बाद युवतियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश के अनुरोध वाले आवेदनों पर मजिस्ट्रेट अदालतों द्वारा अधिक तत्परता से विचार किया जाएगा, विशेषकर जब दहेज से संबंधित उत्पीड़न के आरोप हों। वर्तमान मामले में मृत महिला के पति ने दो जुलाई, 2025 को उसके पिता को सूचित किया कि सीढ़ियों से गिरने के बाद उनकी बेटी अस्पताल में भर्ती है। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर पिता को गड़बड़ी का संदेह हुआ।
बाद में पता चला कि महिला ने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसने तीन जुलाई, 2025 को दम तोड़ दिया, जबकि मजिस्ट्रेट न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इस वर्ष 13 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज की गई।
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